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पारित किए हैं और कोई दूसरा नहीं।
श्री नजरुद्दीनः लेकिन तीसरा संशोधन अधिनियम बिल्कुल नहीं है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः बिल्कुल है। तीसरा अधिनियम जब्त संपत्ति की अभिरक्षा, प्रबंधन और निस्तारण से संबंधित है यहाँ मेरे समक्ष अधिनियम है।
श्री सभापतिः इस मामले के बारे में थोड़ी गलतफहमी दिखती है। चौथा अधिनियम की संख्या नहीं है। यहाँ अधिनियम का चौथे संशोधन के रूप में वर्णन किया गया है। यह अधिनियम की संख्या नहीं है। अधिनियम की संख्या अलग है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह वर्तमान अधिनियम का वर्णन है। यह लघु शीर्षक है।
श्री सभापतिः यह सिर्फ वर्णन है। इसकी संख्या होगी 1949 का अधिनियम संख्या 6
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसा है। यह एक लघुशीर्षक है।
श्री सभापतिः संविधान सभा 1949 में अब तक पाँच अधिनियम पारित कर चुकी है और यह छठा अधिनियम होगा। लेकिन जहाँ तक संशोधनों का संबंध है, यह भारत सरकार अधिनियम में चौथा संशोधन है, और इसलिए इसे चौथा अधिनियम कहा जाता है।
पंडित हृदय नाथ कुँजरु (संयुक्त प्रांतः जनरल)ः यदि हम पाँच अधिनियमों को पहले ही पारित कर चुके हैं .......
श्री सभापतिः यह छठा है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हम इस सभा में पाँच अधिनियम पारित कर चुके हैं उनमें से दो का भारत सरकार, अधिनियम के किसी संशोधन से कुछ भी लेना-देना नहीं है।
पंडित हृदय नाथ कुँजरुः यदि उनका स्वरुप संवैधानिक नहीं था, तो उन्हें संविधान सभा के समक्ष रखा क्यों गया था,
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः लघु शीर्षक अधिनियम के उद्देश्य से बिल्कुल अलग होता है।
पंडित हृदयनाथ कुँजरुः लेकिन पहले का अधिनियम जिसका मेरे माननीय