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खंड 3
$ श्री एच. वी. पटाशस्करः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
कि खंड 3 में ‘‘किसी प्रांत के नाम बदलने ‘‘शब्दों के बाद’’ उस प्रांत जिसका नाम बदलना प्रस्तावित है कि विधानमंडल के सदस्यों की राय जानने के बाद’’ शब्द जोड़ा जाए।
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* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, श्री पटाशस्कर के संशोधन को लेकर मुझे आशंका है कि यह धारा 290 के ढाँचा में सही बैठेगा। मेरे मित्र ने इस बात पर लगता है गौर नहीं किया है कि धारा 290 के खंड (1) के विभिन्न उपखंडों के लिए एक सामान्य परंतुक है, जो सभी उपखंडों (क), (ख), (ग) और (घ) पर लागू होता है। यदि वे उस परंतुक का संदर्भ लें, तो वे पाएँगे कि उनके संशोधन से नए खंड अर्थात् उपखंड (ड) के प्रचालन के लिए दोहरी दशा लागू करेगा। उपखंड (ड) उसके संशोधन अर्थात् उस प्रांत जिसका नाम बदलना प्रस्तावित, के विधानमंडल के सदस्यों की राय जानने के बाद में वह उस दशा का निर्धारण करना उसके अलावा, उपखंड (ड) उस परंतुक अर्थात् गवर्नर जनरल प्रांत की सरकार का विचार मानेगा, से शासित होगा। इसके दृष्टिगत, एक बड़ी कठिन दशा उत्पन्न होगी, उनके संशोधन के अनुसार गवर्नर जनरल विधानमंडल की इच्छाओं का पता लगाने के लिए बाध्य है। धारा 290 के परंतुक के अनुसार, वह प्रांत की सरकार के विचार के लिए बाध्य नहीं होंगे। वह इसलिए स्वयं को इस तथ्य के कारण दोहरी कठिनाई में डाल लेंगे क्योंकि गवर्नर जनरल को दो अलग-अलग निकायों से परामर्श करना पड़ेगा, वह बड़ा आसान मामला नहीं होने जा रहा है। दूसरे वह महसूस करेंगे कि यह बिल्कुल न्यायोचित नहीं है कि उपखंड (क) से (घ) एक ही परंतुक से शासित हो, जबकि नया उपखंड दो उपबंधों द्वारा शासित होना चाहिए।
$श्री एच. वी. पटाशस्करः ऐसा नहीं है।
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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरा यही कहना है। आप कैसे जानते हैं? इसलिए मुझे लगता है कि वह इस प्रकार का सुझाव देकर स्वंय को तथा गवर्नर