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पर निपटाना लेकिन अंतिम विश्लेषण से एक दूसरे को समायजित करने की वास्वतिक समझ पैदा हो चुकी है और सहनशीलता की वास्तविकता भावना पनपी है।
$ मैं इस टिप्पणी के साथ अपनी बात खत्म करूँगा कि मैं यह मानता हूँ कुल मिलाकर हमने एक अच्छा संविधान तैयार किया है। इसमें दोष होंगे तथा निश्चय ही इसमे गलती भी हुई होगी क्योंकि यह अपूर्ण मानवों की तैयार की हुई चीज है। लेकिन मैं मानता हूँ कि हमने एक अच्छा कार्य किया है और मेरा विश्वास है कि इस संविधान को हमारी शुभकामना ही नहीं हमारे आशीर्वाद भी मिलने चाहिए, मैं यह महसूस करता हूँ कि हमारे सामने स्थाई तौर पर जो प्रमुख मुद्दे विचार के लिए आएँगे वह इस बात से नहीं जुड़े होंगे कि हमने एक विस्तृत और महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किया है_ हमने अल्पसंख्यकों को सावधानीपूर्वक विचार करके व्यापक गारंटी दी है, लेकिन अंततः यह संविधान इस आधार पर परखा जाएगा कि यह सफल होता है या असफल, अंतिम कसौटी होगी कि किस मंशा और भावना के साथ इस संविधान का प्रयोग किया जाता है।
$$ डॉ. पट्टभि तारम्मैयाः अंत में मैं आपसे ही यह जानना चाहता हूँ - आखिरकार संविधान क्या है? यह राजनीति का व्याकरण है, यदि आप इसे पसंद करें, तो यह राजनीतिक समुद्रयात्री के लिए नए कंपास हैं। यह कितना भी अच्छा क्यों न हो, यह स्वयं में निर्जीव, संवेदनविहीन होता है और यह अपने आप कार्य कर सकता है। इसका कितना हम उपयोग करें, यह हमारे ऊपर निर्भर करता है क्योंकि यह एक आरक्षित ताकत है और प्रत्येक चीज इस पर निर्भर करती है कि हम किस दृष्टि से इसका उपयोग करते हैं। क्या हम इसमें लिखी बातों का ध्यान रखते हैं, और इसकी भावना की उपेक्षा करते हैं या फिर हम शब्द और भावना दोनों का समान रूप से ध्यान रखते हैं। शब्दकोष के शब्द तो वही होते हैं, लेकिन विभिन्न लेखकों की शैली में उन्हीं शब्दों से भिन्नता आती है। धुन और आलाप तो वही होते है लेकिन अलग - अलग गायक अलग-अलग किस्त का संगीत पैदा करते हैं। रंग और ब्रश तो वहीं होते हैं, लेकिन विभिन्न चित्रकार अलग-अलग चित्र बनाते हैं। यही बात संविधान के साथ भी है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका प्रयोग किस प्रकार करते हैं।..
$$ जब सब कुछ कहा जा चुका हो और किया जा चुका हो, तो हमें यह महसूस करना चाहिए कि केवल आधे दर्जन व्यक्तियों ने ही इस संविधान को तैयार किया है तथा इसे रूप और आकार दिया है तो उनके प्रति क्या कर्तव्य बनता है। हमारे
$ सी.ए.डी. अधिकारिक प्रतिवेदन, खंड X 25 नवंबर 1949, पृष्ठ 942-943
$$ वही, पृष्ठ 945
$$वही, पृष्ठ 946-947