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206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आयु के हो चुके हैं, बड़ी ही शिष्टतापूर्वक प्रारुप समिति के प्रत्येक सदस्य द्वारा दी गई सेवाओं को याद किया है तथा उसकी पहचान की है, जो मैं समझता हूँ कि हम लोग मरते दम तक याद रखेंगे।

लेकिन मैं सबसे महत्वपूर्ण बात पर आना चाहता हूँ कि संविधान की संरचना किस तरीके से बनाई गई है। माननीय सदस्यों को यह महसूस करना चाहिए कि यह संविधान जिसके बारे में मेरे से पूर्व कई वक्ता बता चुके हैं कि समझौते का परिणाम है यहाँ पर जमा हुए 296 लोगों के आर्थिक मामलों पर अलग-अलग मत हैं और हम कोई संविधान इस प्रकार नहीं बना सके कि मैं कहूँ कि मैं कोई बात नहीं होने दूँगा और अन्य लोग उसे मान लेंगे, तो फिर कोई सहमति ही नहीं बन पाएगी। व्यावहारिक तौर पर पूरा संविधान इस संविधान के अति महत्वूपर्ण भाग संबंधित दलों के बीच हुई अंतिम सहमति से बन पाए हैं और कोई भी व्यक्ति अधिकतर प्रतिपादनों से सहमति होने के बाद किसी भी एक प्रतिपादन के बारे में आपत्ति व्यक्ति करता है, तो मेरे हिसाब से यह समुचित नहीं कहा जाएगा। यह संविधान हम में से अधिकतर लोगों के बीच हुई सहमति के परिणामस्वरूप पूरा हो पाया है।

श्री महावीर त्यागीः महोदय, यह अवसर प्रदान करने के लिए मैं आपका आभारी हूँ।

महोदय, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपने जो मुझे चार या पाँच मिनट का समय दिया है, वह भूत, वर्तमान और भविष्य के जीवन का सबसे मूल्यवान क्षण है और यह बड़ा ही रोमांचक क्षण है, आज अपने अति पुराने सपने और तीस वर्षों की मेरी कठिन मेहनत के फल की तस्वीर मेरे सामने है। मेरे सामने एक मूर्त तस्वीर है डॉ. अम्बेडकर, जो मुख्य कलाकार रहे हैं, ने अपना ब्रश नीचे रख दिया है तथा लोगों को दिखाया ताकि उसके बारे में टिप्पणी करने के लिए उस तस्वीर का अनावरण कर दिया है। सभा इस पर पहले ही उदारतापूर्वक टिप्पणी कर चुकी है। यह तस्वीर हम सबने बनाई है और मैं इसके बारे में आगे कोई और टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ आखिरकार हमारे पास जो कुछ सर्वोत्तम चीजें हैं, हमें पूरी ईमानदारी तथा विनम्रता से अपनी भावी पीढ़ी के लिए छोड़कर जाना चाहिए, हमने इसमें काफी मेहनत की है और सर्वोत्तम तरीके से इस पर विचार किया है, और बहुत सारी चर्चा करने तथा गहन विचार-विमर्श करने के बाद इस तस्वीर को पूरा कर पाए हैं। अब हमें पूरे हृदय से इसे भावी पीढ़ी के लिए इस आशा के साथ छोड़ देना चाहिए कि वे हमारी त्रुटियों यदि कोई होगी तो हमें क्षमा कर देंगी और अपनी बुद्धिमत्ता से उन्हें सही कर लेगी। मैं अपना आँखों के

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