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किनारे से देख रहा हूँ तथा सारी दुनिया भी देखेगी कि इस तस्वीर पर खतरे भी मौजूद हैं।
$श्री सुरेश चंद्र मजुमदारः अंत में, मैं डॉ. अम्बेडकर और इस सभा के मेरे वरिष्ठ सहयोगिता को इस महान, कठिन और ऐतिहासिक कार्य के सफलतापूर्वक पूरा करने पर अपना आदरपूर्ण बधाई देना चाहूँगा और मुझे विश्वास है कि यहाँ मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की भावना को अभिव्यक्ति प्रदान कर रहा हूँ जब मैं आपको सभापति महोदय, शांत, चित्त, धैर्यपूर्ण, विनम्रता और अनुकरणीय तरीके से इस सभा में विचार-विमर्श को मार्गदर्शन दिया है, धन्यवाद देता हूँ। जयहिन्द! वन्देमारतम्!!
$$श्री राजबहादुर (राजस्थान)ः सभापति महोदय, मैं आपके प्रारुप समिति और संविधान सभा के कर्मचारियों पर जो उच्चकोटि तथा समुचित श्रद्धा के भाव अर्पित किए गए हैं, उसके साथ सहबद्ध करने के लिए मुझे जो यह अवसर आपने दिया है, उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। यह महानतम ऐतिहासिक महत्व का अवसर है। मैंने महानतम शब्द का प्रयोग किया है क्योंकि हमारे इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्र के चुने हुए प्रतिनिधि एक साथ जमा हुए हैं और देश क े लिए एक संविधान तैयार किया है। इसका महत्व दुगुना हो जाता है क्योंकि जिन महान और मूल्यवान नेताओं ने हमारे देश को आजादी दिलाई वही लोग हमारे संविधान के निर्माता भी हैं...
$.... अंत में मैं केवल इतना जोड़ना चाहूँगा कि इस संविधान के गुण-दोष क्या हैं, यह प्रत्येक चीज इसके कार्य करने के ऊपर निर्भर करती है। जैसा कि ब्राइस ने कहा है ‘‘संविधान बना लेना तो आसान है किंतु संविधान बनाकर ठीक से उपयोग करने के लिए जरूरी स्वभाव को ला पाना आसान नहीं है।
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$$माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, संविधान सभा के कार्य पर पीछे नजर डालें, तो इसकी बैठक 9 दिसंबर, 1949 को हुई थी, तब से लेकर इसे अब दो वर्ष, ग्यारह महीने और सत्तर दिन हो चुके हैं। इस अवधि के दौरान संविधान सभा के कुल मिलाकर ग्यारह सत्र हुए हैं। इन ग्यारह सत्रों में से पहले छह सत्र प्रस्तावना संकल्प को पारित करने और मूल अधिकारों, संघीय संविधान, संघ की शक्तियों, प्रांतीय संविधान अल्पसंख्यकों और अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जातियों से बंधी समितियों के प्रतिवेदन पर विचार करने में समाप्त हो गए। सातवें, आठवें, नौवें, दसवें और ग्यारवें सत्रों के दौरान प्रारुप संविधान पर विचार किया गया। संविधान सभा के इन ग्यारह सत्रों में 165 दिन लगे हैं। इनमें सभा ने प्रारुप संविधान पर विचार करने में 114 दिन लगाए हैं।