208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रारुप समिति का निर्वाचन 29 अगस्त को हुई। 30 अगस्त से लेकर इसकी 141 दिन बैठक हुई। जिसमें प्रारुप संविधान तैयार किया गया। संवैधानिक सलाहकार द्वारा प्रारुप समिति के लिए पुस्तक के रूप में जो प्रारुप संविधान तैयार किया गया था, उसमें 243 अनुच्छेद और 13 अनुसूचियाँ थीं। संविधान सभा को प्रारुप समिति द्वारा प्रस्तुत पहले प्रारुप संविधान में 315 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं। विचारण में अंतिम चरण में प्रारुप समिति ने अनुच्छेदों की संख्या बढ़ाकर 286 कर दी। अंतिम तौर पर, प्रारुप संविधान में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ हैं। प्रारुप संविधान में लगभग 7, 635 संशोधन पटल पर रखे गए। उनमें से सभा के अंदर कुल 2473 संशोधन वास्तविक तौर पर प्रस्तुत किए गए।
मैंने इन तथ्यों का उल्लेख इसलिए किया है कि एक चरण में यह कहा जा रहा था और रोम जल रहा था, वाली कहावत चरितार्थ हो गई। क्या इस प्रकार की शिकायत करने का कोई औचित्य है? आइए हम दूसरे देशों द्वारा अपने संविधान तैयार करने में उनकी संविधान सभाओं द्वारा लिए गए समय पर एक नजर डालते हैं। कुछेक उदाहरण इस प्रकार हैं अमेरिकी अभिसमय की बैठक 25 मई, 1787 को हुई और उसने अपना कार्य 17 सितंबर, 1787 अर्थात् चार महीने के अंदर पूरा कर लिया। कनाडा को संवैधानिक अभिसमय की पहली बैठक 10 अक्तूबर, 1869 को हुई तथा मार्च, 1867 को इसके द्वारा कानून पारित किया गया, उसे दो वर्ष और पाँच महीने लगे। आस्ट्रेलियाई संविधान अभिसमय की बैठक 1891 को हुई और संविधान ने कानून का रूप 9 जुलाई, 1900 को लिया। दक्षितण अफ्रीका अभिसमय की बैठक अक्तूबर 1908 को हुई और संविधान ने 20 सितंबर, 1909 को कानून का रूप लिया इसमें एक वर्ष की मेहनत लगी। यह सच है कि हमने अमेरिकी या दक्षिण अफ्रीकी अभिसमय की तुलना में अधिक समय लिया है। अभिसमय से बहुत कम समय लिया है। लगाए गए समय के आधार पर तुलना करने में दो बातें याद रखनी चाहिएँ। एक तो यह कि अमेरिका, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और आस्ट्रेलिया के संविधान हमारे संविधान की तुलना में बहुत छोटे हैं। हमारे संविधान में जैसा कि मैं बता चुका हूँ, 305 अनुच्छेद हैं जबकि अमेरिकी संविधान में केवल सात अनुच्छेद हैं। जिनमें से पहले चार अनुच्छेद को कुल 21 धाराओं में बाँटा गया है। कनाडा के संविधान में 117, आस्ट्रेलिया के संविधान में 128 और दक्षिण अफ्रीका के संविधान में 153 धाराएँ हैं। दूसरी बात यह याद रखनी चाहिए कि अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के संविधान निर्माताओं को संशोधनों की समस्या का समाना नहीं करना पड़ा था। उनके उपबंध प्रस्तुत होते ही पारित कर दिए गए थे। दूसरी ओर संविधान सभा को 2473 संशोधन निपटाने पड़े थे। इन तथ्यों को देखते हुए विलम्ब करने का आरोप मुझे बिल्कुल निराधार लगता है और