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इतने कम समय में इतना बड़ा कार्य पूरा कर लेने के लिए सभा को स्वयं को बधाई देनी चाहिए।
प्रारुप-समिति द्वारा किए गए कार्य की गुणवत्ता पर चर्चा करें तो श्री नजरुद्दीन ने इसकी पूरी तरह से निंदा करना अपना कर्तव्य समझा। उनकी राय में प्रारुप-समिति द्वारा दिया गया कार्य निंदा करने के ही काबिल है, इसके मानक सामान्य से भी नीचे है। प्रारुप-समिति द्वारा किए गए कार्य के बारे में अपनी राय व्यक्त करने का प्रत्येक व्यक्ति को अधिकार है और श्री नजरुद्दीन की राय का स्वागत है। श्री नजरुद्दीन अहमद की सोच है कि प्रारुप समिति के सदस्यों की अपेक्षा वे कहीं अधिक प्रतिभाव व्यक्ति हैं। प्रारुप-समिति उनके दावे को चुनौती नहीं देना चाहती। दूसरी और प्रारुप-समिति अपने बीच उनका स्वागत करती यदिसभा उन्हें उसमें नियुक्त किए जाने को काबिल मानती। यदि संविधान बनाने के कार्य में उन्हें शामिल नहीं किया गया, तो निश्चय ही यह प्रारूप समिति का दोष नहीं है।
श्री नजरुद्दीन अहमद ने प्रारुप समिति के लिए नया नाम दिया है, वस्तुतः वे इसके प्रति तिरस्कार दिखाना चाहते हैं। वे इस समिति को ड्रिफिंटग कमेटी कहकर बुलाते हैं। श्री नजरुद्दीन अहमद निःसंदेह अपनी अलोचना से खुश होते होंगे। लेकिन स्पष्टतः वह यह नहीं जानते कि मछली पकड़ने का कार्य निपुणता के साथ करने और बिना निपुणता के साथ करने मेंअंतर है। यदि प्रारुप-समिति मछली पकड़ने का कार्य कर भी रही थी, तो वह इसे पूरी निपुणता के साथ कर रही थी। वह मछली पकड़ने के लिए अंदाजा से काँटा नहीं लगा रही थी। वह उसी पानी में काँटा डाल रही थी, जहाँ के बारे में उसे पता था कि वहाँ मछली है। किसी बेहतर चीज की तलाश में रहना मछली पकड़ना नहीं है। यद्यपि श्री नजरुद्दीन अहमद ने यह विशेषण प्रारुप-समिति का अभिवादन करने के लिए नहीं दिया था किंतु मैं इसे प्रारुप समिति को अपना कर्तव्य निभाने में लापरवाही बरतने तथा मिथ्या गरिमा का अहसास रखने का दोषी तब माना जाता जब वह त्रुटिपूर्ण संशोधनों को वापस लेने की ईमानदारी और साहस नहीं दिखाती तथा उसके स्थान पर बेहतर संशोधन प्रस्तुत नहीं करती। यदि उससे गलती हुई, तो मुझे
खुशी है कि प्रारुप-समिति ने इन गलतियों को मानने तथा उन्हें सही करने में सकुचाहट नहीं दिखाई।
मुझे खुशी है कि एक अकेले सदस्य को छोड़कर संविधान सभा के सदस्यों के बीच प्रारुप-समिति के द्वारा किए गए कार्य की सराहना करने के मामले में आम सहमति रही है। मुझे विश्वास है कि इतने उदारता के साथ सहज भाव से इसके परिश्रम को जो मान्यता मिली है, उससे प्रारुप-समिति को खुशी मिलेगी। सभा के सदस्यों तथा प्रारुप-समिति के अपने सहयोगियों दोनों की ओर से जो मुझ पर अभिवादनों की बरसात