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यदि हम लंबे समय तक इसे जारी रखेंगे, तो हम अपने राजनीतिक लोकतंत्र को खतरे में डाल देंगे। हमें यथासंभव शीघ्र ही इन अंतरविरोधों को दूर कर लेना चाहिए अन्यथा असमानता का दुख झेल रहे लोग राजनीतिक लोकतंत्र की संरचना को उड़ा डालेंगे जिसे इस सभा में इतनी मेहनत से तैयार किया है।
दूसरी चीज है भाईचारे के सिद्धांत को मान्यता देना। भाईचारे का क्या अर्थ है? भाईचारे का अर्थ है सभी भारतीयों के बीच एवं साथ भाईचारे की भावना-यदि भारतीय होने का अर्थ है एक जैसे लोग। यही सिद्धांत सामाजिक जीवन को एकता और एकजुटता का प्रभाव प्रदान करता है। इसे प्राप्त करना कठिन है, यह कितना कठिन है इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में ऑन अमेरिकन कामनवेल्थ नामक अपनी पुस्तक के खंड में जेम्सब्राइस द्वारा लिखी गई एक कहानी से महसूस किया जा सकता है।
कहानी है - मैं इसे ब्राइस के शब्दों में ही व्यक्त कर रहा हूँः
‘‘कुछ वर्ष पहले अमेरिकी प्रोटेट एपिसकोपल चर्च में उपासना पद्धति को
संशोधित करने को लेकर एक त्रिवर्षीय सभा चल रही थी। सभी लोगों के
लिए छोटे-छोटे वाक्यों की प्रार्थना शुरू किए जाने को वांछनीय माना गया
और न्यू इंग्लैंड का एक प्रख्यात धर्मविद ने इन शब्दों का प्रस्ताव किया, हे
ईश्वर, हमारे राष्ट्र का कल्याण करें। उस क्षण दोपहर को उस वाक्य को
स्वीकार कर लिया गया, उस वाक्य पर फिर से विचार करने के लिए अगले
दिन फिर बैठक हुई तो बहुत सारे लोगों ने राष्ट्र शब्द के ऊपर आपत्ति करनी
शुरू कर दी क्योंकि इसमें राष्ट्रीयता एकता का निश्चित भाव था उस शब्द
को छोड़ दिया गया और उसके बदले हे ईश्वर, संयुक्त राज्यों का कल्याण
करें वाक्य को अपनाया गया।
जब यह घटना हुई थी, तब संयुक्त राज्य अमेरिका में इतनी कम एकजुटता थी कि अमेरिका के लोग यह सोचते थे कि वे एक राष्ट्र हैं। यदि संयुक्त राज्यों के लोग यह महसूस नहीं कर सके कि वे एक राष्ट्र के रूप में हैं तो भारतीयों के लिए यह सोच पाना कितना कठिन है कि वे एक राष्ट्र हैं। मुझे वह दिन याद है जब राजनीतिक विचारधारा से ग्रस्त होकर कुछ भारतीयों में भारत के लोगों की अभिव्यक्ति पर आपत्ति की थी। वे लोग भारत राष्ट्र हैं, एक बड़ा भ्रम है। कई हजारों जातियों में बँटे लोग एक राष्ट्र कैसे हो सकते हैं? जितनी जल्दी हो सके हम यह स्वीकार कर लें कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक अर्थों में हम एक राष्ट्र नहीं है, हमारे लिए बेहतर है। क्योंकि फिर हम राष्ट्र के रूप में होने की जरूरत को महसूस कर सकेंगे और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तरीके ढूंढे जाने पर गंभीरतापूर्वक सोचेंगे। इस लक्ष्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन