12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘1(क) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 या अधिराज्य विधानमंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के विषयाधीन, संघ न्यायालय1980 का अधिनियम V समय पर गवर्नर जनरल के अनुमोदन से उस तरीके को अपीली अधिकारिता का प्रयोग करते हुए उसके द्वारा पारित डिक्री या दिए गए आदेश को लागू किया जा सके।’’
खंड 9 को उद्देश्य फेडरल न्यायालय को एक पूर्ण और स्वंतत्र न्यायालय बनाना है। विद्यमान भारत सरकार अधिनियम, 1995 जो फेडरल न्यायालय को अपनी डिक्रिया वापस लेने से रोकता था, के अधीन कतिपय सीमाएँ व्याप्त थीं। इसे उस मामले को विचारण न्यायालय में भेजना पड़ता था। इन सभी सीमाओं को वापस लिया जाना जरूरी है, क्योंकि फेडरल न्यायालय प्रिवी काउंसिल का स्थान लेने जा रहा है।
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पंडित ठाकुर दास भार्गवः यह क्षेत्राधिकार के स्थानांतरण का ही प्रश्न नहीं है। मैं तो केवल संशोधन 5 में अंतर्विष्ट चीजों के बारे में बता रहा हूँ और यह परिभाषित कर रहा हूँ। क्या क्षेत्राधिकार प्रदान किया जाएगा, इस बात को जाँचने की संभावना नहीं छोड़ रहा हूँ कि महामहिम के क्या विशेषाधिकार थे, मैं तो केवल इन शक्तियों को ठोस रूप प्रदान कर रहा हूँ जोकि अभी अभूर्त के रूप में ही मौजूद हैं...
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः इस विधेयक में फेडरल न्यायालय को इस आशय का कोई निदेश देने का प्रस्ताव नहीं किया गया है, कि वर्तमान विधेयक में विहित क्षेत्राधिकार का किस तरीके से उपयोग किया जाएगा।
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खंड 11
1 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय मैं उस संशोधन को स्वीकार नहीं करता हूँ क्योंकि वह अनावश्यक है।
{ श्री नजीरूद्दीन का संशोधन अस्वीकृत हुआ। }
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* सी.ए.डी खंड 9, 17 सितंबर, 1949 पृष्ठ 1605-06
* वही पृष्ठ 1612
* वही पृष्ठ 161