नया अनुच्छेद 300क और 300ख - Page 33

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इन दो अनुच्छेदों का उद्देश्य जैसा कि मैं बता चुका हूँ, संविधान को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की सूची के बोझ से बचाना है। अब यह प्रस्ताव किया गया है कि राष्ट्रपति को राज्यपाल या राज्य के साथ परामर्श करके राजपत्र में सामान्य अधिसूचना जारी करने की शक्ति प्रदान की जानी चाहिए जिसमें उन सभी जातियों और जनजातियों या समूहों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के रूप में विनिर्दिष्ट किया जाए, जिनके लिए संविधान में विशेषाधिकार दिए जाने का प्रयोजन परिभाषित किया गया है। इसमें एकमात्र सीमा यह लगाई गई हैः एक बार राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना कर दिए जाने के बाद निस्संदेह वह इसे प्रत्येक राज्य की सरकार के साथ परामर्श करके और उनकी सलाह पर जारी करेगा और उसके बाद यदि अधिसूचित सूची से किसी को निकाला जाना हो या उसमें कोई नाम जोड़ा जाना हो तो वह कार्य संसद द्वारा किया जाना चाहिए न कि राष्ट्रपति द्वारा इसका उद्देश्य राष्ट्रपति द्वारा प्रकाशित की गई अनुसूची में बाधा खड़ी किए जाने के मामले में किसी प्रकार के राजनैतिक कारकों की विद्यमानता को समाप्त करना है।

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1 श्री सभापतिः क्या कोई और बोलना चाहता है? डॉ. अम्बेडकर क्या आप कहना चाहते हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं पंडित ठाकुर दास भार्गव का संशोधन स्वीकार नहीं करता हूँ।

श्री सभापतिः तो फिर मैं संशोधनों पर मत लूँगा।

{ डॉ. अम्बेडकर के दोनों संशोधन स्वीकृत हुए। पंडित भार्गव के निम्नलिखित संशोधन अस्वीकृत हुए। }

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‘‘कि सूची 5 (आठवां सप्ताह) के संशोधन संख्या 201 में प्रस्तावित अनुच्छेद 300क खंड (2) के अंत में निम्नलिखित शब्द जोड़े जाएँः

‘इस संविधान के लागू होने के दस वर्षों के बाद की अवधि के लिए’

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2 श्री सभापतिः अब मैं श्री कृष्णमाचारी के संशोधन, जिसे वास्तव में डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, पर मत लूँगा - 218क।

प्रस्ताव हैः

12 वही, पृष्ठ 1640सी.ए.डी. खंड 9, 17 सितंबर, 1949, पृष्ठ 1639