अनुच्छेद 303 (क्रमशः) - Page 36

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुद्दा यह है कि सामान्य प्रयोजन अधिनियम सभी अधिनियमों, विनियमों और अध्यादेशों पर लागू होता है। इसलिए यह कहना जरूरी है कि इन कानूनों में से कौन सा समूह इस पर लागू होगा। इसी कारण से इस संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।

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श्री जसवंत राय कपूरः मैं यह कहना चाहता हूँ कि संविधान के प्रभावी हो जाने के बाद कोई ऐसा कानून विद्यमान नहीं होगा जिसे ‘‘भारत के अधिराज्य’’ का कानून कहा जा सकता हो। इसलिए, मेरे विचार में यदि हम यह कहें ‘जैसा कि यह भारत अधिराज्य के विधानमंडल के किसी अधिनियम की व्याख्या के लिए लागू हों तो इसके लिए प्रयोजन पूरी तरह से सिद्ध हो जाएगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि मैं गलत नहीं हूँ तो आपने सामान्य प्रयोजन अधिनियम की जाँच नहीं की है।

श्री जसवन्त राय कपूरः इसकी सावधानीपूर्वक जाँच किए बिना किसी उपबंध को शुरू करने का कोई उपयोग नहीं है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस कार्य को देखना कि क्या जरूरी है और क्या जरूरी नहीं है, प्रारुपकारों पर छोड़ दिया जाना बेहतर होगा।

श्री जसवंत राय कपूरः मैं सहमत हूँ कि कोई भी आवश्यक त्रुटियाँ दूर करने का कार्य प्रारुप समिति पर छोड़ दिया जाना चाहिए। लेकिन, किसी गलती के बारे में बताने में कुछ भी नुकसान नहीं है।

 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इसे गलत मानने से इंकार करता

हूँ।

 श्री जसवंत राय कपूरः मुझे पता है कि आपको समझाना आसान नहीं

है।

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1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मुझे जो कुछ कहना था वह मैं कह चुका हूँ और सामान्य प्रयोजन को यहाँ पर देखकर मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि मैंने जो संशोधन प्रस्तुत किया है, वह एक जरूरी संशोधन है।

1 सी.ए.डी खंड 9, 17 सितंबर, 1949, पृष्ठ 1641-42