24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(ड.) इस अनुच्छेद के उपबंधों में
राष्ट्रपति के समक्ष ऐसे संशोधन प्रस्तुत करने हेतु विधेयक पारित करने के उपबंध बनाए जाने से पूर्व पहली अनुसूची के भाग 1 और III में वर्तमान में विनिर्दिष्ट किए जा रहे राज्यों में से कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा उन विधानमंडलों द्वारा पारित इस आश्य के संकल्पों के माध्यम से संशोधन की पुष्टि करने की भी जरूरत पड़ेगी।
महोदय, इस चरण में कुछ नहीं कहना चाहता हूँ क्योंकि मैं पूर्वानुमान कर रहा हूँ कि इस अनुच्छेद पर काफी बहस होगी और मैं अंत में अपनी टिप्पणी दूँगा ताकि मैं संशोधन के विरुद्ध उठाए जा सकने वाले बिदुंओं का स्पष्टीकरण दे सकूँ।
श्री नजरुद्दीन अहमदः अनावश्यक बहस को टालने के लिए अग्रिम में बता देना कहीं अधिक बेहतर है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि मेरे मित्र मुझे गारंटी दें, कि वह समय नहीं लेंगे, तो मैं वैसा ही करूँगा लेकिन मै। जानता हूँ कि मेरे मित्र चित भी मेरी पठ भी मेरी चाहते हैं।
श्री नजरुद्दीन अहमदः महोदय, डा. अम्बेडकर शुरुआत में कोई तर्क नहीं देंगे, वह कह रहे हैं कि वह दूसरे के तर्कों की प्रतीक्षा करेंगे और उत्तर देंगे। लेकिन अंत में तर्क सुनने के बाद इतना ही कहेंगे, ‘‘मैं संशोधन का विरोध करता हूँ और तर्क को अस्वीकार करता हूँ।
श्री सभापतिः हम लोग अब संशोधनों को लेंगे। संशोधन संख्या 119
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः महोदय, मैं संशोधन संख्या 119 को प्रस्तुत नहीं कर रहा हूँ क्योंंकि यह डॉ. अम्बेडकर के संशोधन में शामिल है। यह संशोधन संख्या 207 में शामिल है।
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1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, प्रस्तुत किए गए बहुत सारे संशोधनों पर भाषण दिए गए हैं, मेरे लिए प्रत्येक संशोधन और प्रत्येक वक्ता के बारे में उत्तर देना संभव नहीं है। लेकिन मैं विभिन्न वक्ताओं द्वारा दिए गए इस सुझाव कि हमारे संविधान को भावी संसद द्वारा संशोधन के लिए साधारण बहुमत का
खुला विकल्प रखा जाए या फिर कोई दूसरा तरीका अपनाया जाए जो अनुच्छेद 304 में शामिल अंतर्विष्ट तरीकों की तुलना में अधिक लचीला हो, को सामान्य विकल्प के तौर पर स्वीकार करने जा रहा हूँ।
1 सी.ए.डी. खंड 9, 17 सितंबर, 1949, पृष्ठ 1659-1663