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महोदय, मैं अनुच्छेद 304 में अंतर्विष्ट उपबंधों के बारे में व्याख्या करूँ, उससे पहले मैं सभा को संविधान संशोधन के मामले में दूसरे संविधानों के उपबंधों के बारे में बताना चाहूँगा। मैं शुरुआत कनाडा के संविधान से करता हूँ। इसमें संशोधन का कोई उपबंध ही नहीं है। यद्यपि कनाडा आज डोमिनियम राज्य है। संप्रभुत्ता की सारी विशेषताओं के साथ वह एक संप्रभु राज्य है और उसे संविधान बदलने की शक्ति है, कनाडावासियों ने संसद में संविधान संशोधन करने की अनुमति देने वाला खंड अंतःस्थापित करना सही नहीं समझा और वर्तमान में भी ऐसा नहीं किया गया है। यह भी याद रखा जाना चाहिए कि कनाडा का संविधान 1867 में ही तैयार हो चुका था और किसी भी व्यक्ति जिसने कनाडा के संविधान से संबंधित, विभिन्न पुस्तकें पढ़ी हैं, के मन में इस बारे में कोई संशय नहीं होना चाहिए कि उस संविधान में दिए गए विभिन्न खंडों तथा उसके उपबंधों की प्रिवी काउंसिल द्वारा की गई व्याख्या के बारे में काफी असंतोष रहा है, फिर भी कनाडावासियों ने संविधान के संशोधन से संबंधित अंतःस्थापित करने की अपनी शक्तियों का उपयोग करना उपयुक्त नहीं समझा है।
मैं आयरलैंड संविधान पर आता हूँ। आयरलैंड संविधान में एक उपबंध है कि दोनों ही सभाओं द्वारा साधारण बहुमत द्वारा आयरिश संविधान को बदला जा सकता है या किसी भाग का निरसन किया जा सकता है बशर्ते संविधान को संशोधित करने, निरस्त करने या बदलने के सभाओं के निर्णय जनमत संग्रह में लोगों के सामने रखे जाएँ और लोग बहुमत द्वारा उसका अनुमोदन करें।
फिर हम स्विस संविधान का उदाहरण लें। इस संविधान में भी यह व्याख्या है कि विधानमंडल संशोधन करने वाला विधेयक पारित कर सकता है लेकिन संशोधन तब तक लागू नहीं होगा जब तक दो शर्तें पूरी नहीं हो जाती। एक तो यह कि कैंटनों के बहुमत को संशोधन स्वीकार हो और दूसरे जनमत संग्रह भी हो- जिससे लोगों के बहुमत को संशोधन स्वीकार्य हो। संविधान को जहाँ तक बदलने का संबंध है स्विटजरलैंड में विधानमंडल द्वारा विधेयक पारित कर दिए जाने का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
अब मुझे आस्ट्रेलिया के संविधान का उदाहरण देने दीजिए। उस संविधान में यह उपबंध हैः संशोधन आस्ट्रेलिया संसद के पूर्ण बहुमत द्वारा पारित किया जाना चहिए। फिर, इसके पारित हो जाने के बाद इसे उन लोगों के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाना चाहिए जिन्हें आस्ट्रेलिया संसद के लोअर हाउस के प्रतिनिधियों को निर्वाचित करने का अधिकार है। फिर इसे लोगों या मतदाताओं के जनमत के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। अगली शर्त यह हैः इसे राज्यों के बहुमत स्वीकार करें तथा मतदाताओं के बहुमत को भी यह स्वीकार्य रहे।