अनुच्छेद 304 - Page 41

26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अमेरिका के संविधान में यह उपबंध है कि संशोधन दोनों सभाओं के दो-तिहाई बहुमत से स्वीकार किया जाना चाहिए और यह इस तथ्य के विषयाधीन है क दोनों सभाओं में दो-तिहाई बहुमत से लिए गए इस निर्णय की पुष्टि राज्यों के दो-तिहाई बहुमत से होनी चाहिए। मैंने इन तथ्यों का उल्लेख यह बताने के लिए किया है कि किसी भी संविधान को साधारण बहुमत से संशोधित करने का प्रावधान नहीं किया गया है।

अब मैं अपने संविधान के उपबंध पर आता हूँ। अपने संविधान में संशोधन के मामले में हम क्या प्रावधान रखना चाहते हैं? हमने संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को तीन श्रेणियों में विभाजित करने का प्रस्ताव किया है। एक श्रेणी में हमने कतिपय अनुच्छेदों को रखा है जिन्हें संसद के साधारण बहुमत से संशोधित किया जा सकता है। दुर्भाग्यवश उस तथ्य की ओर ध्यान इस कारण से नहीं गया है क्योंकि अनुच्छेद 304 में इस मामले का उल्लेख नहीं किया गया है, बल्कि संविधान के अन्य अनुच्छेदों में ऐसा किया गया है। मैं उनमें से कुछ का उल्लेख करता हूँ। अनुच्छेद 2 और 3 का उदाहरण लीजिए जो राज्यों से संबंधित है। जहाँ तक नए राज्यों के निर्माण या विद्यमान राज्यों के पुनर्गठन का संबंध है। इसे संसद द्वारा साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है। उसी प्रकार से अनुच्छेद 148-क का उदाहरण लें, जो प्रांतों के ऊपरी सदन को समाप्त कर सकती है अथवा जिस प्रांत में दूसरा सदन नहीं है, उसमें नए सदन का सृजन कर सकती है। अब अनुच्छेद 213 को लीजिए जो भाग II में उल्लिखित राज्यों से संबंधित है। राज्यों के गठन करने तथा उनमें संशोधन करने का निर्णय संसद द्वारा साधारण बहुमत से किए जाने की बात कही गई है।

फिर अनुसूची V और VI को लें। उन्हें भी संसद द्वारा साधारण बहुमत से संशोधित करने के लिए छोड़ दिया गया है। मैं संविधान में कई अनुच्छेद गिना सकता हूँ जैसे अनुच्छेद 25 जो अनुदानों और वित्तीय उपबंधों से संबंधित है, उन्हें संसद द्वारा बनाए जाने वाले कानून के विषयाधीन छोड़ दिया गया है। अतः बहुत से मामलों में मुझे पूरे संविधान की जाँच करने का समय नहीं मिल पाया और इसलिए मैं केवल यह बता रहा हूँ- हमने अपने संविधान में कुछ चीजें छोड़ दी हैं जिन्हें साधारण बहुमत से संशोधित किए जाने का तरीका है। मेरे उन मित्रों जो इस बात की निरंतर आलोचना करते रहे हैं कि संसद को संविधान में साधारण बहुमत द्वारा संशोधन करने या उन्हें बदलने की व्यापक शक्ति विद्यमान रहनी चाहिए थी, ने यदि मुझे कोई ठोस मामला सुझाया होता या कोई निश्चित अनुच्छेद का उल्लेख किया हो ताकि उसे भी उस श्रेणी में रखा जाए, तो प्रारुप समिति उस पर विचार कर सकती थी। उसके स्थान पर यह कहना कि पूरे संविधान को संसद के साधारण बहुमत से संशोधन करने का उपबंध होना चाहिए,