अनुच्छेद 304 - Page 45

30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्योंकि इसका निर्वाचन व्यस्क मताधिकार के आधार पर हीं हुआ है तथा यह कि लोगों के बड़े जनसमूह को इस संविधान में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। परिणामतः इस सभा को संविधान बनाते समय यह कहने का अधिकार नहीं है कि अनुच्छेद 304 का जो प्रस्ताव है वह अंतिम है। महोदय, यह सही हो सकता है कि यह सभा इस अर्थ में प्रतिनिधिमूलक सभा नहीं है कि इस सभा के सदस्य वयस्क मताधिकार के आधार पर नहीं चुने गए हैं। मैं उस तर्क को स्वीकार करने को तैयार हूँ, लेकिन फिर यदि उसका आगे जो यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि यदि सभा वयस्क मताधिकार पर चुनी गई होती तो उसके पास कहीं अधिक बुद्धिमानी और राजनीतिक ज्ञान से भरे सदस्य होते, तो मैं इस निष्कर्ष को पूरी तरह से खारिज करता हूँ।

श्री नजरूद्दीन अहमदः यह और भी खराब होता!

माननीय डारु. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद का यह कहना है कि यह और भी खराब होता तो मैं उनकी बात से सहमत हूँ। शक्ति ज्ञान का एक साथ समावेश नहीं होता। अक्सर वे अलग-अलग होते हैं और मैं बिल्कुल स्पष्ट रूप से यह कहता हूँ कि यह सभा जिस भी रूप में यह वर्तमान में है, के पास भावी संसद की तुलना में संभवतः कहीं अधिक मात्रा में ज्ञान और सूचना उपलब्ध है। महोदय, इसलिए मेरा यह कहना है कि प्रारुप समिति द्वारा प्रस्तावित अनुच्छेद वर्तमान परिस्थितियों में सर्वोत्तम है।

श्री सभापतिः अब मैं संशोधनों पर मत लूँगा।

[ संशोधन अस्वीकृत हुए तथा पूर्व में उल्लिखित डा. अम्बेडकर के संशोधन स्वीकृत हुए। अनुच्छेद 304, यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया ]

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1 श्री ब्रजेश्वर प्रसादः महोदय, अब सात बच चुके हैं।

सेठ गोविंद दासः अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है और मैं नहीं समझता हूँ कि हम इसे समाप्त कर पाएँगे। अतः मेरा प्रस्ताव यह है कि हम आज रात्रि नौ बजे फिर बैठे और बारह बजे रात्रि तक कार्य करें या फिर हम कल सवेरे बैठक करें।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हमारे पास केवल तीन अनुच्छेद है।

श्री टी. टी. कृष्णमाचारीः हमारे पास केवल तीन अनुच्छेद हैं, जिनमें से

1 डाट्स व्यवधान को दर्शाता है।