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2 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, इस मामले पर पिछली बार विस्तार से बहस हुई थी। जब यह अनुच्छेद सभा के समक्ष आया तो इसे व्यवहारिक तौर पर बड़ी लंबी बहस के अंत में रखा गया क्योंकि उस समय इस निर्णय पर पहुँचना संभव नहीं था कि इंडिया या किसी और शब्द के बाद ‘‘भारत’’ शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए या नहीं, लेकिन यदि मैं सही याद कर रहा हूँ तो ‘संघ’ शब्द सहित पूरे अनुच्छेद पर विस्तृत बहस हुई थी। हम लोग अब इस पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या ‘‘भारत’’ शब्द ‘‘इंडिया’’ के बाद आना चाहिए। अनुच्छेद के शेष मुख्य भाग पर विस्तार से बहस हो चुकी है।
श्री एम.बी. गुप्तेः मैं यह नहीं कहता कि हम जो कुछ कर चुके हैं, वही फिर से करें। मैं तो केव इस सबके निहितार्थ और परिणाम के बारे में बता रहा हूँ....
1 श्री कमलापति त्रिपाठीः जब हम इस शब्द (भारत) का उच्चारण करते हैं, तो हमें शंकराचार्य का स्मरण हो जाता है, जिन्होंने विश्व को एक नई अंतर्दृष्टि दी। जब हम इस शब्द का उच्चरण करते है।,तो हमें भगवान राम का स्मरण हो आता है जिन्होंने अपनी शक्तिशाली भुजाओं से अपने धनुष की डोर खींची तो उसकी गूंज हिमालय, इस भूमि के पास अवस्थित सागरों तथा स्वर्ग तक सुनाई पड़ी थी। जब हम इस शब्द का उच्चारण्सा करते हैं तो हमें भगवान कृष्ण के चक्र का स्मरण हो आता है जिसने भारत से क्षत्रियों के भयानक साम्राज्य को समाप्त करके इस भूमि को इस बोझ से मुक्त कराया।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, क्या यह सब बोलना आवश्यक है?
श्री कमलापति त्रिपाठीः महोदय, मैं आपको केवल तर्कसंगत बातें सुना रहा हूँ।
माननीय डा. बी. आर. अम्बेडकरः बहुत सारे कार्य बाकी हैं।
श्री कमलापति त्रिपाठीः जब हम इस शब्द का उच्चारण करते हैं, तो हमें बापू का स्मरण हो आता है, जिन्होंने मानवता को एक नया संदेश दिया।
हमें यह देखकर खुशी हुई है कि इस शब्द का प्रयोग किया गया है और हम डा. अम्बेडकर को बधाई देते हैं। यदि उन्होंने श्री कामथ द्वारा प्रस्तुत इस संशोधन को स्वीकार कर लिया होता जिसमें कहा गया है ‘‘भारत को अंगे्रजी भाषा ‘इंडिया’ के रूप में जाना जाता है’’
12 वही, पृष्ठ 1685सी.ए.डी. खंड 9, 18 सितंबर, 1949, पृष्ठ 1689