अनुच्छेद 306 - Page 54

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श्री सभापतिः क्या मैं डा. अम्बेडकर से कुछ पूछ सकता हूँ? मेरी धारणा यह है कि तेल की खली और अन्य पदार्थों सहित पशुओं के चारे उन मदों में शामिल रहे हैं जिन पर एक समय पर्याप्त रूप से नियंत्रण करना आवश्यक समझा गया। भारत सरकार अधिनियम में संशोधन किए जाने की माँग की गई। लेकिन उस समय इसमें संशोधन नहीं किया जा सका और उस समय काफी कठिनाई महसूस की जा रही थी। मैं नहीं जानता कि क्या आपने उस पहलू पर विचार किया है या नहीं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस अनुच्छेद को उद्योग और आपूर्ति विभाग के परामर्श से फिर से प्रारूपित किया गया है। हमने इन सभी मामलों को इसमें डाल दिया है जिनके बारे में उन लोगों का यह मानना था कि पाँच वर्षों की अवधि के लिए केंद्र द्वारा इन्हें नियंत्रित किया जाना जरूरी है। यदि सभा का यह विचार हो कि उपखंड (ग) में शामिल किए गए मदों में किसी वस्तु विशेष को शामिल किया जाना चाहिए, तो निश्चय ही मुझे उस पर कोई आपत्ति नहीं है।

श्री सभापतिः मैं अपने अनुभव से बोल रहा हूँ कि अब यह बात पुरानी हो गयी है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचार से उस मद को शामिल करना बल्कि वांछनीय है।

डा. पी. एस. देखमुखः (सी.पी. और बरारः जनरल)ः वह कृषि विभाग के परामर्श से किया जा सकता है।

श्री सभापतिः मेरा सुझाव यही है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं समझता हूँ कि हम लोग उसे जोड़ सकते हैं। मैं इसमें पशुओं के चारे सहित खाद्य पदार्थ भी रख सकता हूँ।

श्री सभापतिः तेल की खली और अन्य ठोस पदार्थों सहित पशुओं के चारे।

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1 श्री सभापतिः क्या कोई और बोलने के इच्छुक है? डा. बी. आर. अम्बेडकर?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मुझे बस इतना ही कहना था। मैं श्री बृजेश्वर प्रसाद द्वारा प्रस्तुत संशोधन को स्वीकार करने में समर्थ नहीं हूँ। आपके द्वारा तथा मेरे मित्र डा. कुंजरू द्वारा सुझाए गए अन्य संशोधनों का जहाँ तक संबंध

1 सी.ए.डी. खंड 10, 7 अक्तूंबर, 1949, पृष्ठ 6