अनुच्छेद 306 - Page 55

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है, मैं यह कह सकता हूँ कि उनके बारे में खुले विचार हैं और मैं उद्योग और आपूर्ति मंत्रालय से परामर्श करने के बाद आवश्यक संशोधन पुनःस्थापित करने के लिए तैयार हूँ। इसलिए, अभी मेरे संशोधन को स्वीकार कर लिया जाए।

श्री सभापतिः और कृषि मंत्रालय भी। आप उस मंत्रालय से भी परामर्श करें।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ महोदय। मैं संबंधित मंत्रालयों से परामर्श करूँगा।

श्री सभापतिः डॉ. अम्बेडकर ने जो कुछ कहा है, उसके विषयाधीन मैं अनुच्छेद पर मत लूँगा। मैं पहले संशोधन संख्या 1 लेता हूँ। डा. देशमुख का संशोधन संख्या 2 का स्वरूप कुल मिलाकर शाब्दिक है और वह इसे प्रारुप समिति पर छोड़ सकते हैं और संशोधन संख्या 3 की भी यही स्थिति है। संशोधन संख्या 4 के बारे में क्या कहना है।

डॉ. पी.एस. देखमुखः मैं इसे प्रस्तुत नहीं कर रहा हूँ।

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{ डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकृत }