अनुच्छेद 390-क और 310-ख - Page 57

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

310-ख (1)इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत डोमिनियन के

लोक सेवा आयोग के पद धारण करने वाले सदस्य, यदि वे अन्यथा निर्वाचन

न कर चुके हों तो ऐसे प्रारंभ पर लोक सेवा आयोग के बारे में उपबंध संघ

के लोक सेवा आयोग के सदस्य हो जाएँगे और अनुच्छेद 285 के खंड (1)

और खंड (2) में किसी बात के होते हुए भी, किंतु उस अनुच्छेद के खंड

(2) के परंतुक के अधीन रहते हुए, अपनी उस पदावधि की समाप्ति तक

पद धारण करते रहेंगे जो ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसे सदस्यों को लागू

नियमों के अधीन अवधारित है।

(2) इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले किसी प्रांत के लोक सेवा आयोग

के प्रांतों के समूह की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले किसी लोक सेवा

आयोग के पद धारण करने वाले सदस्य, यदि वे अन्यथा निर्वाचन न कर चुके

हों, तो ऐसे प्रारंभ पर, यथास्थिति, तत्स्थानीय राज्य के लोक सेवा आयोग के

सदस्य या तत्स्थानीय राज्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले संयुक्त

राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य हो जाएँगे और अनुच्छेद 316 के खंड

(1) और खंड (2) में किसी बात के होते हुए भी, किंतु उस अनुच्छेद के

खंड (2) के परंतुक के अधीन रहते हुए, अपनी उस पदावधि की समाप्ति

तक पद धारण करते रहेंगे जो ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले ऐसे सदस्यों को लागू

नियमों के अध्ीन अवधारित है।’’

महोदय, ये अनुच्छेद महज कतिपयपदों, जो संविधान द्वारा विनियमित होते हैं, जैसे कि लोक सेवा आयोग के सदस्य और महालेखापरीक्षक, पर आसीन व्यक्तियों को अपने पद पर बने रहने का उपबंध करते हैं इन अनुच्छेदों में कोई भी सिद्धांत का मुद्दा शामिल नहीं है।

* * * * *

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं डॉ. देशमुख के संशोधन को स्वीकार नहीं करता। यह अनावश्यक है।

श्री सभापतिः मैं पहले डा. देशमुख के संशोधन पर मत लूँगा।

प्रस्ताव हैः

‘‘कि सूची 1 (पहले सप्ताह) के संशोधन संख्या 12 में, प्रस्तावित नए

अनुच्छेद 310-ख में, इस संविधान के प्रारंभ से’ शब्दों के बाद जहाँ कहीं

भी वे आएँ हों, ‘जिनकी सेवाएँ किसी भी कारण से समाप्त कर दी गई हों’,

शब्द अंतःस्थापित किए जाएँ।’’

संशोधन अस्वीकृत हुआ।

1 सी.ए.डी. खंड 10, 7 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 8