अनुच्छेद 312 - Page 63

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 312

1 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 312 के स्थान पर, निम्नलिखित अनुच्छेद अंतःस्थापित रखा।

‘‘312 (1) पहली अनुसूची के भाग में वर्तमान में विनिर्दिष्ट किए जा रहे राज्य के विधानमंडल के सदन या सदनों का जब तक सम्यक रूप से गठन न हो चुका हो और इस संविधान के उपबंधों के अधीन पहले सत्र के अधिवेशन के लिए आहूत नहीं किया गय हो इस संविधान के प्रारंभ के ठीक पहले कार्यरत तत्स्थानी प्रांत के विधानमंडल के सदन या सदनों द्वारा उन शक्तियों का प्रयोग किया जाएगा और उन कर्तव्यों का निर्वहन किया जाएगा जो इस संविधान के उपबंधों के माध्यम से ऐसे राज्य के विधानमंडल के सदन या सदनों को प्रदान किए गए हों।

(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के रहते हुए भी जहाँ इस संविधान के प्रारंभ के पूर्व किसी प्रांत की विधानसभा को पुनर्गाठित करने हेतु आम चुनाव कराने का आदेश दिया जा चुका हो, संविधान के इस प्रकार से प्रारंभ के पश्चात चुनाव पूरा कराया जा सकता है जैसे कि यह संविधान प्रभावी नहीं हुआ हो इस प्रकार से पुनर्गठित सभा को उस खंड के प्रयोजनार्थ उस प्रांत की विधान सभा माना जाएगा।

(3) इस संविधान के प्रारंभ के ठीक किसी प्रांत की विधानसभा के अघ्यक्ष या विधान परिषद के सभापति का पद धारण करने वाला व्यक्ति संविधान के प्रारंभ के पश्चात् विधानसभा का अघ्यक्ष या विधान परिषद का सभापति बना रहेगा जैसी की पहली अनुसूची के भाग 1 मे वर्तमान में अंतर्विष्ट किए जा रहे तत्स्थानी राज्य की स्थिति हो जबकि ऐसी सभा या परिषद इस अनुच्छेद के खंड (1) के आधीन कार्यरत रहती है जहाँ इस संविधान के प्रारंभ से पूर्व किसी प्रांत की विधानसभा का पुनर्गठन करने हेतु आम चुनाव कराने का आदेश दिया जा चुका हो और संविधान के प्रारंभ होने के पश्चात इस प्रकार से पुनर्गठित की जा चुकी सभा की पहली बैठक हो चुकी हो, इस खंड के उपबंधा लागू नही होंगें और पुनर्गठित की गई सभा अपने किसी सदस्य का अघ्यक्ष के रूप मे निर्वाचित करेगी। उपबंध बिल्कुल स्पष्ट है और मैं नही समझता कि उसके बारे मे कोई स्पष्टीकरण देने की जरूरत है।