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312च इस संविधान के प्रारंभ के ठीक पहले भारत डोमिनियन के विधानमंडल
या भारतीय प्रांत या भारतीय राज्य के विधानमंडल में लंबित कोई विधेयक,
इस संविधान के अधीन संसद या तत्स्थानी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाए
गए नियमों में शामिल किसी उपबंध के विषयाधीन रहते हुए भी संसद या
तत्स्थानी राज्य के विधानमंडल जो भी स्थिति हो, में इस प्रकार से बना रहेगा
जैसे कि डोमिनियन विधानमंडल या प्रांतीय विधानमंडल या भारतीय राज्य के
विधान मंडल में विधेयक के संदर्भ में की गई कार्यवाहियाँ संसद या तत्स्थानी
राज्य के विधानमंडल में हुई हों।
भारत या किसी राज्य की समेकित निधि में से धनराशि के विनियोग से संबंधित इस संविधान के उपबंध इस संविधान के प्रारंभ और इकतीस मार्च, 1950 के बीच की अवधि जिसमें दोनों दिन शामिल हैं, के दौरान भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार द्वारा प्राप्त की गई या वसूली गई या खर्च की गई धनराशि के संबंध में लागू नहीं होंगे और उस अवधि के दौरान हुए व्यय के सम्यक रूप से प्राधिकृत माना जाएगा, यदि भारत डोमिनियन का गवर्नर जनरल या तत्स्थानी प्रांत के गवर्नर द्वारा भारत सरकार अधिनियम, 1935 के उपबंधों के अनुरूप या राज्य के राजप्रमुख द्वारा ऐसे नियमों, जो संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले तत्स्थानी भारतीय राज्य के राजस्व से व्यय के प्राधिकृत करने के मामले में लागू हों, के अनुरूप उसे प्राधिकृत किया गया हो।’’
मुझे नहीं लगता कि इन अनुच्छेदों के स्पष्टीकरण के तौर पर कुछ भी कहना आवश्यक है।
नोटिस पेपर पर दो संशोधनों, जिनकी संख्या 18 और 19 है, के बारे में सूचना दी गई है जिनमें अनुच्छेद 312क और 312ख में आए ‘अनंतिम’ शब्द का लोप करने का प्रस्ताव किया गया है।
मैं इन संशोधनों को स्वीकार करने का प्रस्ताव करता हूँ और इसके बारे में हम पहले ही सहमत हो चुके हैं।
डॉ. पी.एस. देशमुखः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि उपर्युक्त संशोधन संख्या 16 में, प्रस्तावित नए अनुच्छेद 312ख में जहाँ कहीं ‘अनंतिम’ शब्द आया हो, को हटा दिया जाए।’’
‘‘कि उपर्युक्त संशोधन संख्या 16 में, प्रस्तावित नए अनुच्छेद 312क जहाँ कहीं ‘अनंतिम’ शब्द आया हो, उसे हटा दिया जाए।
मुझे खुशी है कि ये संशोधन डा. अम्बेडकर को स्वीकार्य है। मेरा यह कहना है