52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कि राष्ट्रपति या राज्यपाल को ‘अनंतिम’ कहकर सम्बोधित करना उनकी गरिमा के प्रतिकूल है। मैं सभा द्वारा संशोधनों को स्वीकार किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करता हूँ।
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1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। मेरे मित्र श्री कामथ और प्रो. सक्सेना ने इस अनुच्छेद 312घ को काफी व्यापक अनुच्छेद मान लिया है। तथ्य तो यह है कि अनुच्छेद का बहुत सीमित महत्व है और इस अनुच्छेद से किसी क्षेत्र विशेष की जनसंख्या निर्धारण का प्रश्न जुड़ा हुआ है। मेरे मित्र बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि अनुच्छेद जिसे हम पारित कर चुके हैं, के अनुसार चुनाव के प्रयोजनार्थ जनसंख्या का निर्धारण गत जनगणना के आधार पर किया जाना है। यह भी स्वीकार किया गया है कि भारत के विभागन को देखते हुए 1941 की जनसंख्या के आंकड़े को सही नहीं माना जा सकता और परिणामतः निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और सीटों का निर्धारण विभाजित प्रांतों जिनके जनसांख्यकीय आंकड़े पूरी तरह गड़बड़ा चुके हैं, के आधार पर नहीं हो सकता। इसलिए, किसी ने किसी को यह प्राधिकार देना पड़ेगा कि वह यह निर्धारित करे कि किस जनसंख्या को स्वीकार किया जाए और क्या जनगणना में विनिर्दिष्ट जनसंख्या को आधार माना जाए या SèkC 37 जैसा कि कह चुका हूँ कि मतदाताओं की संख्या के आधार पर ही जनसंख्या का निर्धारण कर लिया जाए। ये सारे मामले राष्ट्रपति पर छोड़ दिए गए हैं और मुझे इस प्रकार के मामले में संसद का अनुमोदन जरूरी नहीं लग रहा है। यह पूरी तरह से प्रशासनिक मामला है जो इस मामले की विशेष परिस्थितियों के कारण उत्पन्न हुआ है कि मेरे विचार से यदि हम वास्तव में यह चाहते हैं कि चुनाव जल्दी हो तो इस मामले को राष्ट्रपति पर छोड़ना कहीं अधिक वांछनीय है। इसलिए मैं अपने मित्र श्री कामथ द्वारा प्रस्तुत संशोधन को स्वीकार करने में असमर्थ हूँ।
श्री एच.वी. कामथः क्या डॉ. अम्बेडकर को मेरे संशोधन के सिद्धांत के बारे में कोई आपत्ति है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इसे स्वीकार नहीं करता हूँ। इस अनुच्छेद का उद्देश्य बड़ा ही सीमित है। यह जनसंख्या का निर्धारण है, न कि निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन। निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन संविधान के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा।
[ डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित तथा डा. पी.एस. देशमुख द्वारा यथा संशोधित अनुच्छेद 312क से 312ड. और 312न स्वीकृत हुए तथा संविधान में जोड़े गए। ]
1 सी.ए.डी. खंड 10, 7 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 26-27