अनुच्छेद 313 - Page 68

53

अनुच्छेद 313

1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 313 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किए जाएँः-

(1) राष्ट्रपति किन्हीं ऐसी कठिनाईयों को जो विशिष्टतया भारत शासन

अधिनियम, 1935 के उपबंधों से इस संविधान के उपबंधों के संक्रमण के

संबंध में हों, दूर करने के प्रयोजन के लिए आदेश द्वारा निदेश दे सकेगा कि

यह संविधान SèkC 38 उस आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान रूपांतरण,

परिवर्धन या लोप के रूप में ऐसे अनुकूलनों के अधीन रहते हुए प्रभावी होगा

जो वह आवश्यक या समीचीन समझेः

परंतु ऐसा कोई आदेश भाग 5 के अध्याय 2 के अधीन सम्यक रूप से

गठित संसद के प्रथम अधिवेशन के पश्चात् नहीं किया जाएगा।

(2) खंड (1) के अधीन किया गयया प्रत्येक आदेश संसद के समक्ष रखा

जाएगा।

‘‘यह भारत सरकार अधिनियम में अंतर्विष्ट उपबंध की नकल है, जोकि

संक्रमणकालीन अवधि के लिए जरूरी है।’

2 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, अनुच्छेद 313 में अंतर्विष्ट उपबंधों की आवश्यकता के संबंध में काफी गलत आशंका मौजूद लगती है। मेरे मित्र श्री देशमुख, जिन्होंने अपना संशोधन प्रस्तुत किया है, बहुत ही अनुग्रहपूर्वक बता चुके हैं कि यदि मैं अनुच्छेद 313 में अंतर्विष्ट उपबंधों के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण दे दूँ, तो वह अपने संशोधन को स्वीकृत किए जाने पर जोर नहीं देंगे। अनुच्छेद 319 के संबंध में मेरे विचार से कतिपय तथ्यों को स्वीकार करना होगा। पहला तथ्य जो सभी को स्वीकार्य होगा, मैं यह उम्मीद करता हूँ, वह इस प्रकार है। संक्रमणकाल के दौरान कतिपय कठिनाइयाँ उत्पन्न होना लाजिमी है, जिसके बारे में प्रारुप समिति इस सभा के किसी सदस्य के लिए अभी से अनुमान लगा पाना तथा कोई उपबंध कर पाना संभव नहीं है। इसलिए, यह जरूरी है कि इन अदृश्य कठिनाइयों को सुलझाने के लिए कहीं न कही कुछ शक्ति विद्यमान रहनी चाहिए।

12 सी.ए.डी. खंड 10, 77 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 27-28वही, पृष्ठ 30-31