अनुच्छेद 313 - Page 69

54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसलिए प्रश्न यह है कि उस प्राधिकारी विशेष में कितनी और कितने समय के लिए शक्तियाँ बनी रहनी चाहिए। मेरे मित्र डा. देशमुख ने कहा कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 310 के अधीन वह शक्ति 6 महीने की अवधि के लिए थी। मैं समझता हूँ कि वह गलत कह रहे हैं। भाग III के प्रचालन में आने के बाद से वह शक्ति 6 महीने तक के लिए प्रदान की गई थी। हमारा एक बड़ा ही सीमित उपबंध है। अनुच्छेद 313 द्वारा निहित कठिनाइयों को सुलझाने की शक्ति उसी दिन स्वतः ही समाप्त हो जाएगी जिस दिन नए उपबंधों के अधीन नई संसद अस्तित्व में आ जाती है। इसलिए, हमने इस अनुच्छेद के अधीन राष्ट्रपति को अनुच्छेद 313 के अधीन प्रदान की गई शक्तियों का प्रयोग संशोधन करने के हकदार समुचित प्राधिकार के अस्तित्व में आ जाने के एक दिन बाद भी नहीं कर सकेगा। इस अनुच्छेद 313 की एक विशेषता तो यह है।

इस तथ्य को स्वीकार करने में कठिनाइयाँ उत्पन्न होंगी और उन्हें सुलझाया जाना चाहिए और यह शक्ति किसी में निहित होनी चाहिए, यह प्रश्न वास्तव में विचार किए जाने के योग्य हैः क्या यह शक्ति राष्ट्रपति में निहित होनी चाहिए या फिर यह अनंतिम संसद में निहित होनी चाहिए। कोई और अन्य विकल्प नहीं हो सकता। प्रारुप समिति ने इस कारण अनुच्छेद 313 में अंतर्विष्ट उपबंधों को स्वीकार करना तथा राष्ट्रपति में शक्ति निहित करना वांछनीय माना है, क्योंकि संक्रमणकालीन संसद की अवधि बहुत कम है तथा वह संसदीय विधायन के अन्य जरूरी मामले के कारण संक्रमणकाल के दौरान उस मामले पर विचार कर पाना संभव नहीं हो पाएगा, जिसका शीघ्र समाधान होना चाहिए।

मैं एक या दो कठिनाइयाँ जो उत्पन्न हो सकती हैं, के बारे में बताना चाहता हूँ। अपने संविधान के माध्यम से हमने राज्यों तथा केंद्र की कराधान शक्तियों में काफी परिवर्तन किए है। आगामी 26 जनवरी को जब संविधान लागू हो जाएगा, तब भारत सरकार अधिनियम के अधीन भारतीय रियासतों द्वारा कराधान की शक्ति स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। इससे संकट पैदा हो जाएगा और इसलिए इस मामले का नियमितीकरण होना चाहिए। यदि हम इसका नियमितीकरण अनंतिम संसद के माध्यम से करें तो मै। समझता हूँ कि मेरे मित्र इस बात को महसूस करेंगे कि इसमें काफी समय लगेगा और यह संकट बना रहेगा। इसलिए साधारण संसदीय प्रक्रिया जिसमें किसी विधेयक का तीन बार पठन करना, प्रवर समिति के पास भेजना और उसे परिचालित करना अनिवार्य होता है, का अपनाने के बजाय संविधान को इन कठिनाइयों से बचाने के प्रयोजनार्थ यह शक्ति राष्ट्रपति में निहित होनी चाहिए, ताकि वह जल्दी कार्रवाई कर सके। इसलिए, मैं यह बता चुका हूँ कि यह उपबंध जरूरी है। धारा 310 में अंतर्विष्ट उपबंधों की तुला में हमारा प्रस्ताव बड़ा ही सीमित है तथा मैं यह कहना चाहता हूँ कि इन परिस्थितियों को देखते हुए सभा को अनुच्छेद 313 को स्वीकार करने में कोई गंभीर या मूलभूत आपत्ति नहीं होनी चाहिए।