अनुच्छेद 313 - Page 70

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मैं अपने मित्र श्री कामथ द्वारा उठाए गए मुद्दे के संबंध में समझता हूँ कि वह इस बात को महसूस करेंगे कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 का मूल कानून तथा अंगीकृत किए गए कानून के बीच कोई अंतर किए बगैर उल्लेख करने में प्रारुप समिति की कोई गलती नहीं है, क्योंकि वह पाएँगे कि अंगीकृत कानून में ही यह उपबंध किया गया है कि इसका लघु शीर्षक ‘‘भारत सरकार अधिनियम, 1935’’ होगा और मुझे कोई शंका नहीं है कि इस अनुच्छेद का निर्वाचन करते समय उसी अर्थों में इसे समझा जाएगा।

डॉ. पी.एस. देशमुखः क्या मैं एक प्रश्न कर सकता हूँ? यदि राष्ट्रपति द्वारा पारित आदेश का अनुमोदन संसद से करने के लिए कहा जाए, तो क्या कोई नुकसान होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः लेकिन ‘‘अनुमोदन’’ का अर्थ क्या है? यह राष्ट्रपति द्वारा की गई कार्रवाई को रद्द कर सकती है और उपबंध का उद्देश्य प्रभावी उपचार का उपबंध करना है। उस तरीके से उसे शीघ्रता से लागू नहीं किया जा सकता जबकि हम चाहते हैं कि इसे तुरंत लागू किया जाए।

श्री सभापतिः मैं अब संशोधनों को लूँगा। डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत संशोधन संख्या 97

‘कि सूची I (पहले सप्ताह) के संशोधन संख्या 203 में, प्रस्तावित अनुच्छेद 313 के खंड (2) में ‘प्रत्येक सभा’ शब्दों का लोप किया जाए।’’

डॉ. पी.एस. देशमुखः महोदय, मैं अपने संशोधन संख्या 30, 31 और 32 वापस लेना चाहता हूँ लेकिन संशोधन संख्या 33 वापस नहीं लेना चाहता हूँ।

सभा की अनुमति से संशोधन संख्या 30, 31 और 32 वापस लिए गए।

(अनुच्छेद 313, यथासंशोधित, संविधान में जोड़ा गया।)

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अनुच्छेद 307

1 श्री विश्वनाथ दासः इस संबंध में मेरी शिकायत यह है कि न तो विधि विभाग और न ही संविधान सभा के कार्यालय ने इस दिशा में एक इंच भी कदम बढ़ाया है। मैं यह उम्मीद करता था कि उन लोगों ने अगीकृत किए जाने वाले भाग को तैयार रखा होगा तथा लागू होने वाले कानूनों की जाँच कर ली होगी।

1 सी.ए.डी खंड 10, 10 अक्तूबर, 1949 पृष्ठ 65