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अनुच्छेद 310
1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 310 के लिए निम्नलिखित अंतःस्थापित किए जाएँः
(1) अनुच्छेद 193 के खंड (2) में किसी बात के होते हुए भी, इस
संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले किसी प्रांत के उच्च न्यायालय के पद
धारण करने वाले न्यायाधीश, यदि वे अन्यथा निर्वाचन न कर चुके हों तो,
ऐसे प्रारंभ पर तत्स्थानी राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायालय हो जाएँगे और
तब ऐसे वेतनों और भत्तों तथा अनुपस्थिति, छुट्टी और पेंशन के संबंध में
ऐसे अधिकारों के हकदार होंगे। जो ऐसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के
संबंध में अनुच्छेद 197 के अधीन उपबंधित है।
(2) इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहली अनुसूची के भाग प्प्प् में विनिर्दिष्ट
किसी राज्य के तत्स्थानी किसी राज्य के उच्च न्यायालय के पद धारण करने
वाले न्यायाधीश, यदि वे अन्यथा निर्वाचन न कर चुके हों तो, ऐसे प्रारंभ पर इस
प्रकार विनिर्दिष्ट राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएँगे और अनुच्छेद
193 के खंड (1) और खंड (2) में किसी बात के होते हुए भी, किंतु उस
अनुच्छेद के खंड (1) के परंतुक के अधीन रहते हुए, ऐसी अवधि की समाप्ति
तक पद धारण करते रहेंगे जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे।
(3) इस अनुच्छेद में, ‘‘न्यायाधीश’’ पद के अंतर्गत कार्यकारी न्यायाधीश
या अपर न्यायाधीश नहीं है।
इस अनुच्छेद को हम ‘‘आगे बढ़ाने वाला अनुच्छेद’’ के रूप में जानते रहे हैं जिसके माध्यम से पद्धारियों को नए उच्च न्यायालयों के नए कार्यालयों में भेजे जाने की व्यवस्था की गई है। यदि वे लोग नियुक्त होना चाहते हैं।
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1 सी.ए.डी खंड 10, 10 अक्तूबर, 1949 पृष्ठ 77
2 वही, पृष्ठ 79-80