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अनुच्छेद 311

1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 311 के लिए निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएः

311 ( i ) जब तक संसद के दोनों सदनों का सम्यक रूप से गठन न हो

चुका हो और इस संविधान के उपबंधों के अधीन पहले सत्र के अधिवेशन

के लिए उन्हें आहूत नहीं किया गया हो, इस संविधान के प्रारंभ के ठीक

पहले भारत डोमिनियन की संविधान सभा के रूप में कार्यरत निकाय द्वारा

उन शक्तियों का प्रयोग किया जाएगा और उन कर्तव्यों का निर्वहन किया

जाएगा जो इस संविधन के उपबंधों से संसद को प्रदान किए गए हैं।

‘‘कि सूची I (दूसरे सप्ताह) के संशोधन संख्या 9 में, प्रस्तावित अनुच्छेद 311

के खंड (3) के बाद, निम्नलिखित नया खंड अंतःस्थापित किया जाए।

(3क) भारत डोमिनयम की संविधान सभा में कोई रिक्ति नहीं हुई हो जैसा कि

इस अनुच्छेद के खंड (3) में उल्लेख किया गया है, तो भी इस संविधानें प्रारंभ से

पहले ऐसी किसी रिक्ति को भरने हेतु कदम उठाए जा सकते हैं, लकिन संविधन

के प्रारंभ से पहले रिक्ति को भरने हेतु चुना गया व्यक्ति उक्त सभा में अपनी सीट

का हकदार तब तक नहीं होगा जब तक सीट रिक्त्तनहीं हो गई हो।’’

इस खंड का उद्देश्य यह है कि अनंतिम संसद के गठन के समय दोहरी सदस्यता को दूर कर लिया जाए। अन्य उपबंध महज आनुषंगिक हैं।

2 श्री सभापतिः डॉ. अम्बेडकर, क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बंबई जनरल)ः महोदय, अपनी बात शुरू करने से पूर्व में संशोधन संख्या 195 में ‘‘तत्पश्चात्’’ और किसी समय पहले’’ शब्दों के बीच आए शब्द ‘होता है’ का लोप करने के लिए अनुमति चाहताँ हूँ। यह शब्द अनावश्यक है।

अब, जहाँ तक विभिन्न संशोधनों का संबंध है, मुझे लगता है कि तीन ही संशोधन ऐसे हैं जिन पर विचार किए जाने की जरूरत है। पहला संशोधन तो मेरे मित्र श्री कामथ का है जिन्होंने इस अनुच्छेद के खंड (4) के बारे में कहा है कि केंद्र में उपाध्यक्ष को बनाए रखने से संबंधित उपबंधों और प्रांतों में अध्यक्ष को बनाए रखे जाने से संबंधित

12 सी.ए.डी. खंड 10, 10 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 77वही, पृष्ठ 79-80