अनुच्छेद 311 - Page 78

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बाद प्रभावित होनी चाहिए और उसके एक महीने के बाद सदस्य की सदस्यता समाप्त होनी चाहिए, यही एकमात्र अंतर है। मुझे यह प्रतीत होता है कि यह केवल विस्तृत विवरण का मामला है कि हमें किस तिथि से स्थान रिक्त होना मानना चाहिए और किस तिथि से सदस्यता समाप्त होना माना जाना चाहिए। हमने जो 6 अक्तूबर, 1949 को किसी सदस्य के सदस्य बने रहने के अधिकार देने के लिए जो तिथि निर्धारित की है। उसका यह कारण है कि इस तिथि को हमने संविधान सभा का यह सत्र आरंभ किया था। मैं इसमें कोई सिद्धांत की बात नहीं देखता कि 6 अक्तूबर, 1949 में कोई विशेष गुण है और न ही पटास्कर यह कहेंगे कि उन्होंने जो अपना संशोधन प्रस्तुत किया है उस उपबंध में कोई विशेष गुण मौजूद है। जैसा कि मैं बता चुका हूँ कि सिद्धांतः इस बारे में कोई मतभेद नहीं है और हम सभी इस बता पर सहमत हैं कि दोहरी सदस्यता को टाला जाना चाहिए और इसलिए मैंने यह संशोधन प्रस्तुत करना उचित समझा।

श्री एच.बी. पटाश्करः मेरा संशोधन सदस्य को यह विकल्प प्रदान करता है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे विचारर में उससे बहुत अधिक जटिलता पैदा हो जाएगी। यदि सदस्य को विकल्प दिया जाता है तो उससे जटिलता पैदा हो जाएगी क्योंकि उससे वही बुराई पैदा हो जाएगी जिसे हम समाप्त करना चाहते हैं और वह बुराई बार-बार उठती रहेगी। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए कि वह बुराई फिर से पैदा नहीं हो। मैं इसलिए यह अनुरोध करता हूँ कि अनुच्छेद 311 में अंतर्विष्ट उपबंधों को सभा द्वारा सहमति प्रदान की जाए।

श्री राम सहाय (मध्य भारत)ः श्री सीता राम जाजू द्वारा प्रस्तुत संशोधन के बारे में क्या हुआ।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हमने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे का पूर्वानुमान कर लिया था और हमने संशोधन संख्या 195 के माध्यम से इसे संशोधित कर दिया है जिसके अंतर्गत मैंने भारतीय रियासतों के लिए उपबंध बनाया है। मैंने लाभ के पद धारण करने वाले व्यक्तियों के बारे में ही केवल उपबंध नहीं बनाया है।

श्री सभापतिः अब मैं संशोधनों पर एक-एक कर मत लूँगा।

{ श्री कामथ द्वारा प्रस्तुत 6 संशोधन, श्री त्यागी द्वारा प्रस्तुत 2 संशोधन, श्री मुन्नीस्वामी द्वारा प्रस्तुत 4 संशोधन, श्री सक्सेना द्वारा प्रस्तुत 1 संशोधन और अन्य सदस्यों द्वारा प्रस्तुत 4 संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 311 डॉ. अम्बेडकर के संशोधन द्वारा यथासंशोधित, संविधान में जोड़ गया। }

1 सी.ए.डी. खंड 10, 11 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 98-100