अनुच्छेद 312-ड. - Page 80

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सूची III (दूसरे सप्ताह) के संशोधन संख्या 164 में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रतिस्थापित किया जाएः-

स् पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनार्थ

( क) आदेश, 1936 में विनिर्दिष्ट ऐसी सभी जातियाः, नस्लें या जनजातियाँ या उन

जातियों, नस्लों या जनजातियों के भाग या समूह जो भारत सरकार (अनुसूचित

जाति) आदेश, 1936 में विनिर्दिष्ट हैं, को किसी प्रांत के संबंध में अनुसूचित

माना जाएगा, को उस प्रांत या तत्संबंधी राज्य के संदर्भ में अनुसूचित जाति

माना जाएगा जब तक अनुच्छेद 300-क के खंड (1) के अधीन राष्ट्रपति

द्वारा एक अधिसूचना नहीं जारी कर दी गई हो जिसमें उस तत्संबंधी राज्य

के संबंध में अनुसूचित जातियों को विनिर्दिष्ट नहीं किया गया हो (ख) किसी प्रांत या राज्य में सभी अनुसूचित जातियों को एक ही समुदाय का माना

जाएगा।’’

(2) इस संविधान के अनुच्छेद 312 या 312-ग के अधीन कार्यरत किसी राज्य

के अनंतिम विधानमंडल की किसी सभा के सदस्यों की सीटों में आकस्मिक

रिक्तियों को भरा जाएगा और (ऐसी रिक्तियों को भरने हेतु होने वाले चुनावों

में उत्पन्न या उससे संबंधित शंकाओं और विवादों के निर्णय सहित) से

संबंधित सभी मामलों को ऐसी रिक्तियों को भरे जाने को शासित करने वाले

तथा ऐसे मामले को विनियमित करने वाले ऐसे उपबंधों जो इस संविधान के

शुरू होने से तुरंत पहले प्रभावी थे, के अनुसार ऐसे अपवाद तथा संशोधनों

जैसा कि राष्ट्रपति आदेश के द्वारा निदेश दे।

मैं नहीं समझता कि कोई भी स्पष्टीकरण जरूरी है। बिल्कुल स्पष्ट प्रावधान है। बहस के दौरान यदि कोई मुद्दा उठाया जाता है तो जो भी स्पष्टीकरण दे सकता हूँ, देने को तैयार हूँ।

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1 माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, इस बहस के दौरान केवल एक दो मुद्दे उठाए गए हैं। पहला मुद्दा श्री सक्सेना द्वारा उठाया गया है और पंडित भार्गव ने इस अंतरिम अवधि के दौरान मुस्लिमों और सिक्खों के प्रतिनिधित्व जारी रखने के संबंध में चर्चा की थी। इस प्रतिनिधित्व के जारी रहने का उन्होंने इस आधार पर आपत्ति की थी कि मुस्लिमों और सिक्खों ने इस संविधान सभा की कार्यवाही के दौरान की गई व्यवस्था के अधीन विशेष प्रतिनिधित्व का अधिकार छोड़ दिया है। इस मुद्दे पर

1 सी.ए.डी. खंड 10, 11 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 1012-113