66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मेरा यह कहना है कि चाहे जो भी व्यवस्था की गई हो वह संसद की स्थाई संरचना के संबंध में की गई है जो कि इस संविधान के अधीन प्रचालन में आना बाकी है। ऐसी स्थिति में, मेरा यह मानना है कि संविधान सभा-जो कि नई व्यवस्था को लागू कर रही है और अनंतिम संसद के रूप में गठत की गई है-की संरचना को बदलना न तो सही होगा और न ही न्यायोचित होगा।
जहाँ तक श्रीमती पूर्णिमा बनर्जी के संशोधन का संबध है, मैं नहीं समझता कि इस संविधान सभा में महिलाओं को बनाए रखने के लिए विशिष्ट उपबंध किए जाने की जरूरत है। मुझे इसमें कोई संशय नहीं है कि राष्ट्रपति नियम बनाने की अपनी शक्ति का प्रयोग करने के दौरान इस तथ्य का ध्यान रखेगा तथा यह सुनिश्चित करेगा, संविधान सभा या विभिन्न दलों की कतिपय महिलाओं को अनंतिम संसद के सदस्यों के रूप में लाया जाए।
जहाँ तक श्री मुन्नी स्वामी पिल्लै को संशोधन का संबंध है। वह नई बात यह चाहते हैं कि अनुसूचित जनजातियों के लिए उपबंध शुरू किया जाए। तथ्यात्मक दृष्टि से अनुसूचित जनजातियों के लिए उपबंध बनाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, किंतु मुद्दा यह है कि वर्तमान में अनुसूचित जनजातियों को विनिर्दिष्ट नहीं किया गया है क्योंकि अनुसूचित जनजातियों जैसी किसी चीज को भारत सरकार अधिनियम के अधीन मान्यता नहीं दी गई है। भारत सरकार अधिनियम 1935 के अधीन जिन जनजातियों को प्रतिनिधित्व देने के लिए शामिल किया गया है। उन्हें पिछड़ी जनजातियों की संज्ञा दी गई है। परिणामतः यदि मेरे मित्र मुन्नी स्वामी पिल्लै यदि इस मामले को प्रारुप समिति के हाथों छोड़ दें तो हम संभवतः उनके संशोधन को प्रभावी बनाने के लिए कुछ समुचित व्यवस्था करेंगे।
श्री सभापतिः अब मैं संविधान पर मत लूँगा।
{ 3 संशोधन अस्वीकृत हुए। डॉ. अम्बेडकर के संशोधन द्वारा यथा संशोधित अनुच्छेद 312-घ संविधान में जोड़ा गया। }
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1 श्री सभापतिः फिर हम अनुसूची IV लेंगे।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ कि अनुसूची का IV लोप किया जाए।
कुछ माननीय सदस्यः इसका किस प्रकार लोप किया जा सकता है?
श्री सभापतिः जहाँ तक प्रारुप समिति का संबंध है वह अनुच्छेद विशेषों का लोप करने का प्रस्ताव करती रही है। अब इस अनुसूची IV का संशोधन किए जाने की बात कही गई है। मेरे विचार से अच्छा रहेगा कि यदि डा. अम्बेडकर यह स्थिति स्पष्ट कर पाएँ कि इस अनुसूची को क्यों हटा दिया जाए, क्योंकि सदस्यों ने संशोधनों
1 सी.ए.डी. खंड 10, 11 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 114