72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रारंभ से ठीक पहले प्राप्त कर रहा था ।
(3) ऐसा कोई व्यक्ति जो संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ से, ठीक पहले, पहली अनुसूची के भाग ख में विनिर्दिष्ट किसी राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में पद धारण कर रहा था और जो ऐसे प्रारंभ पर उक्त अधिनियम द्वारा यथा संशोधित उक्त अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति बन गया है, यदि वह ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले अपने वेतन के अतिरिक्त भत्ते के रूप में कोई रकम प्राप्त कर रहा था, तो ऐसे मुख्य न्यायमूर्ति के रूप में वास्तविक सेवा में बिताए समय के लिए इस पैरा के उपपैरा (1) में विनिर्दिष्ट वेतन के अतिरिक्त भत्ते के रूप में वही रकम प्राप्त करने का हकदार होगा।
11. इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो -
(क) ‘‘मुख्य न्यायमूर्ति’’ पद के अंतर्गत कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति है और ‘‘न्यायाधीश’’ पद के अंतर्गत तदर्थ न्यायाधीश है_
(ख) ‘‘वास्तविक सेवा’’ के अंतर्गत -
( i ) न्यायाधीश द्वारा न्यायाधीश के रूप में कर्तव्य पालन में या ऐसे अन्य
कृत्यों के पालन में, जिनका राष्ट्रपति के अनुरोध पर उसने निर्वहन करने का
भार अपने ऊपर लिया है बिताया गया समय है_
( ii ) उस समय को छोड़कर जिसमें न्यायाधीश छुट्टी लेकर अनुपस्थित है,
दीर्घावकाश है_ और
( iii ) उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय को यह एक उच्च न्यायालय से
दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण पर जाने पर पदग्रहण-काल है।
भाग V
- (1) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को चार हजार रुपये प्रतिमास की दर
से वेतन का भुगतान किया जाएगा।
(2) ऐसा कोई व्यक्ति, जो इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के
महालेखापरीक्षक के रूप में पद धारण कर रहा था और जो ऐसे प्रारंभ पर
अनुच्छेद 377 के अधीन भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक बन गया है, इस
पैरा के उपपैरा (1) में विनिर्दिष्ट वेतन के अतिरिक्त विशेष वेतन के रूप में
ऐसी रकम प्राप्त करने का हकदार जो इस प्रकार विनिर्दिष्ट वेतन और ऐसे
वेतन के अंतर के बराकर है। जो वह इसके प्रारंभ से ठीक पहले भारत के