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महालेखापरीक्षक के रूप में प्राप्त कर रहा था।
आपकी अनुमति से कल उपबंधों के बारे में मैं स्पष्टीकरण दूँगा।
श्री सभापतिः सभा कल सवेरे मध्या“न पूर्व 10.00 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है।
तत्पश्चात् सभा बुधवार 12 अक्तूबर, 1949 को मध्या“न पूर्व 10.00 बजे तक के लिए स्थगित हुई।
बुधवार 12 अक्तूबर, 1949
भारत की संविधान सभा संविधान सभागार, नई दिल्ली में मध्या“न पूर्व 10.00 बजे (बुधवार 12 अक्तूबर, 1949) को समवेत हुई। श्री सभापति (माननीय डॉ. राजेन्द्र प्रसाद) पीठासीन थे।
दूसरी अनुसूची - (क्रमशः)
1 डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बंबई - जनरल)ः सभापति महोदय, मैं दूसरी अनुसूची में अंतर्विष्ट उपबंधों की व्याख्या करते हुए कुछ शब्द कहूँगा और मैं उस भाग से शुरू करना चाहूँगा जो न्यायाधीशों के वेतन से संबंधित हैं।
सबसे पहले उच्चतम न्यायालय के मामले में यह देखा जा सकता है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन से संविधान के लागू होने के समय इस प्रकार होंगे, मुख्य न्यायाधीश का वेतन 5000/- रुपए प्रतिमाह और किराया मुक्त आवास तथा अवर न्यायाधीश का वेतन 4000/- रुपए प्रतिमाह और किराया मुक्त आवास होंगे। उच्चतम न्यायालय के मामले में स्थिति संविधान के अनुसार इस प्रकार है कि फेडरल न्यायालय का कोई न्यायाधीश यदि उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीशों बनने का विकल्प चुनता है, तो यह प्रश्न उठता हैः कि क्या उसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए संविधान में निर्धारित मानक वेतन मिलना चाहिए या फिर उसे वही वेतन मिलते रहने के लिए कोई उपबंध किया जाना चाहिए जोकि अभी उसे फेडरल न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में प्राप्त होता है। प्रारुप समिति का निर्णय यह रहा है कि जब उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के समान वेतन दूसरी अनुसूची में रखी गयी है तो फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों को वेर्तमान में जो वेतन मिल रहा है वही वेतन देने के लिए एक उपबंधा बनाया जाना चाहिए। यदि वह उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनने का विकल्प चुनता है। इस प्रयोजनार्थ उच्चतम
1 सी.ए.डी खंड 10, 12 अक्तूबर, 1949 पृष्ठ 119-122