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द्वारा सुझाए गए उपबंध के अनुरूप क्या-क्या भत्ते मिलेंगे? और संविधान के लागू होने के समय गवर्नर जनरल को मिलने वाले भत्ते ही लागू होंगे।
मैंने 1949-50 के बजट अनुमान से निम्नलिखित आंकड़े प्राप्त किए हैं जो ‘‘गवर्नर जनरल के भत्ते’’ शीर्ष के अधीन बजट में शामिल किए गए थेः
प्रतिवर्ष 45,000 रुपये का कुल भत्ता
संविदा भत्ता पर व्यय 4,65,000 रुपए
राज्य परिवहन भत्ताः मोटर कारः 73,000 रुपए
यात्र खर्चः 81,000 रुपए
1949-50 के बजट अनुमान के अनुसार कुल भत्ते 6,64,000/- रुपए होते हैं।
मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं यह कह चुका हूँ कि संसद द्वारा किसी भी समय भत्तों को बदला जा सकता है। वेतन के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि प्रारुप समिति ने जो राष्ट्रपति का वेतन 10,000/- रुपए निर्धारित किया है, वह मुझे उन परिस्थितियों को देखते हुए जिनका मैंने जिक्र किया है बहुत उचित प्रतीत होते हैं।
मुझे राज्यपालों के वेतन के बारे में बहुत अधिक कहने की जरूरत नहीं है। गवर्नर जनरल द्वारा हाल ही में जारी किए गए आदेश के द्वारा उनका वेतन निर्धारित किया गया है जो कि मुझे बिल्कुल सही प्रतीत होता है और प्रांतों के मामले में भी वही सिद्धांत अपनाया गया है कि राज्यपाल जोकि सबसे बड़ा अधिकारी है उसका वेतन उस प्रांत के मुख्य न्यायाधीश से थोड़ा अधिक होना चाहिए। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए राज्यपालों का वेतन निर्धारित किया गया है।
मैं एकमात्र उपबंध जिसका उल्लेख करना चाहता हूँ वह यह है कि मूल रूप में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के वेतन के संबंध में हुए उपबंध नहीं किया गया था। फिर अनुसूची 2 के द्वारा उसका वेतन 4000 रुपए प्रतिमाह निर्धारित किया गया है जोकि इस शर्त के विषयाधीन है कि वर्तमान पदधारित जब तक नियंत्रक और लेखा महापरीक्षक के रूप में कार्य करता रहेगा उसे सूची 2 के द्वारा निर्धारित वेतन तथा वर्तमान में प्राप्त किए जा रहे वेतन के बीच अंतर रुपए के समतुल्य वैयक्तिक वेतन मिलेगा। फिर जब वह पदधारी उस पद को छोड़ देता है और किसी दूसरे की नियुक्ति की जाती है तो उसे अनुसूची द्वारा निर्धारित वेतन मिलेगा।