78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं आशा करता हूँ कि इस अनुसूची के माध्यम से विभिन्न पदाधिकारियों के लिए निर्धारित किए गए वेतन के संबंध में प्रारुप समिति ने जो आंकड़े सुझाए हैं उसकी इस सभा द्वारा सराहना की जाएगी।
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1 श्री प्रभु दयाल हिम्मत सिंहः महोदय, मैं डा. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत अनुच्छेद का समर्थन करता हूँ।
पंडित हृदयनाथ कुँजरू (संयुक्त प्रांत - जनरल)ः सभापति महोदय, प्रारुप संविधान में यह उपबंध किया गया था कि राष्ट्रपति को प्रतिमाह 5000 रुपए का वेतन मिलना चाहिए और किसी राज्य के राज्यपाल को 4,500 रुपए प्रतिमाह। उस समय यह प्रस्ताव किय गया था।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः राष्ट्रपति को 5,500 रुपए प्रतिमाह।
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3 माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूँ कि यहाँ तीन मुद्दे उठाए गए हैं और जिनके उत्तर दिए जाने की जरूरत है। श्री कामथ ने अनुसूची 2 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को मुफत आवास दिए जाने के उपबंध पर हमला किया है। संविधान के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए आवास का प्रावधान किए जाने के प्रश्न पर सावधानीपूर्वक विचार किए जाने के बाद निर्णय लिया गया था। यह महसूस किया गया था कि उच्चतम न्यायालय में नियुक्त किए जाने वाले बड़ी संख्या में न्यायाधीश इस देश के सुदूर भागों से राजधानी शहर में आयेंगे और उन लोगों को अपने ही संसाधन से आवास की खोज करने को छोड़ देना समुचित नहीं होगा और साथ ही उनके पद के अनुरूप भी नहीं होगा। यही प्रमुख कारण था कि प्रारुप समिति ने यह महसूस किया कि सरकार को उन्हें आवास मुहैया कराना चाहिए।
आवास को किराया मुक्त किए जाने के संबंध में हमने यह सोचा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन की तुलना में जो कटौती की गई है इससे उनकी कुछ हद तक प्रतिपूर्ति हो जाएगी। निजी तौर पर मुझे अपने माननीय मित्र श्री कामथ द्वारा इस मुद्दे पर की गई कड़ी टिप्पणी
* सी.ए.डी. खंड 10, 12 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 144
* डाट्स व्यवधान को दर्शाता है - इडा
* वही, पृष्ठ 148