भाग V - Page 94

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पर आश्चर्य हुआ क्योंकि यदि वह किसी को किराया मुक्त आवास दिए जाने पर आपत्ति कर रहे हैं तो फिर मैं उनसे यह भी उम्मीद करूँगा कि हम लोग जो राष्ट्रपति तथा गवर्नर जनरल को, जो मुफत आवास मुहैया करा रहे हैं उसके बारे में भी कुछ कहेंगे और वैयक्तिक तौर पर मेरा ...

श्री एच.वी. कामथः मैंने किराये का उल्लेख नहीं किया था और मैं तो यह भी नहीं जानता कि किराया मुक्त है या नहीं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि श्री कामथ द्वारा इस विशेष मुद्दे पर की गई टिप्पणी में कोई सार है।

वेतनों की धनराशि का जहाँ तक संबंध है उसके बारे में सभा में विभिन्न प्रकार के विचार सामने आए हैं। मेरे मित्र श्री शिब्बनलाल सक्सेना ने विस्तारपूर्वक यह बताया है कि राष्ट्रपति को 1 रुपए से अधिक का वेतन नहीं मिलना चाहिए। ठीक है लेकिन मेरा यह मानना है उस पारिश्रमिकता पर राष्ट्रपति के पद पर कार्य करने के लिए किसी घुमंतू सन्यासी को छोड़कर कोई और दूसरा व्यक्ति उपलब्ध नहीं होगा और मुझे इसमें कोई भी संदेह नहीं है कि ये घुमंतू सन्यासी संघ के राष्ट्रपति के पद के लिए सर्वथा अयोग्य व्यक्ति होगा चाहे उसमें कितने भी अन्य गुण क्यों न मौजूद हों।

न्यायाधीशों के वेतन के संबंध में दो प्रश्न उठाए गए हैं। इस सभा में कुछ लोग ऐसे है जिन्होंने यह कहा है कि न्यायाधीशों के वेतन अनुसूची में निर्धारित वेतन से कहीं अधिक होने चाहिए। अन्य व्यक्ति ऐसे जिन्होंने यह कहा है कि हमने जो मानक वेतन निर्धारित किए हैं उसका देश की भुगतान करने की क्षमता के साथ संबंध नहीं है। मेरे विचार से यह जो नारा है कि इस देश में हम जो कुछ निर्धारित करते हैं उसका लोगों की आय के साथ संबंध होना चाहिए और यह एक अच्छा राजनीतिक नारा है लेकिन मैं यह कहने के लिए तैयार नहीं हूँ कि यह एक व्यवहारिक राजनीतिक है। इस देश में तथा अन्य देशों में भी अधिकतर मामले में वेतन पूर्ति और माँग के सिद्धांत पर निर्भर करता है। दुर्भाग्यवश या सौभाग्यवश यहाँ बहुत सारे ऐसे व्यक्ति मौजूद हैं जिन्हें विधानमंडल के सदस्यों के रूप में कार्य करने के लिए योग्य पाया जा सकता है और उसका परिणाम यह होता है कि हमें उनके वेतन बहुत कम स्तर पर निर्धारित करने पड़ते हैं। सौभाग्यवश या दुर्भाग्यवश न्यायाधीशों के रूप में कार्य करने के लिए उपलब्ध व्यक्तियों की संख्या बहुत सीमित है। मेरा कहने का यह मतलब नहीं है कि वे दुर्लभ हैं लेकिन निश्चय ही वे लोग अति कठिन वस्तु है जिसे प्राप्त करना मुश्किल है और उसके परिणामस्वरूप हमें उन्हें बाजार मूल्य पर वेतन देना पड़ेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि इस अनुसूची में जो वेतन निर्धारित किए गए हैं वह बाजार मूल्य के समतुल्य है।