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आशा करता हूँ कि सभा अनुसूची को यथासंशोधित रूप में स्वीकार करेगी।
श्री आर.के. सिधवाः राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन तथा भत्तों से संबंधित मेरे संशोधन का क्या हुआ?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उसका निर्णय संसद द्वारा किया जाएगा।
श्री सभापतिः अब मैं भागों के अनुसार अनुसूची के संशोधनों को लूँगा। हम लोग अभी अनुसूची के भाग I पर हैं।
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श्री सभापतिः डॉ. अम्बेडकर द्वारा संशोधन संख्या 270 का तीसरा भाग स्वीकार किया गया। जैसा कि इसमें है, तीसरे भाग में कहा गया हैः
‘‘अनुसूची के प्रस्तावित भाग IV के पैरा 11 के उप-पैरा (2) में ‘‘इस पैराग्राफ के उप-पैरा में विनिर्दिष्ट शब्दों के बाद’ शब्द जोड़े जाएँ’’ इस पैराग्राफ के उप-पैराग्राफ में विनिर्दिष्ट वेतन के अलावा।’’
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं अपने शब्द डालना चाहूँगा।
(डा. अम्बेडकर के सभी संशोधन स्वीकृत हुए। दूसरी अनुसूची यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया।)
भोजनावकाश के बाद अपरान्ह चार बजे सभा पुनः बैठी (माननीय डा. राजेन्द्र प्रसाद) पीठासीन हुए।
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* सी.ए.डी. खंड 10, 12 अक्तूबर, 1949, पृष्ठ 148