(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 110

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इसी के आधार पर मैं एक अन्य विषय पर विचार रखती हूँ, जो महिलाओं की प्रतिष्ठा से संबंधित है, जिसका संबंध महिलाओं को सम्पत्ति रखने के निरापद अधिकार से है। यह अधिकार उनमें जीवनकाल तक ही सीमित नहीं है। यह विधेयक महिला की सम्पत्ति से सम्बद्ध दोष को दूर करता है और इससे महिला को अधिकार मिल जाता है कि वह अपनी सम्पत्ति को पूर्ण रूप से अपने अधिकार में रखे तथा केवल जीवनपर्यन्त ही अधिकार में न रखे। महिलाओं के संबंध में सम्पत्ति को सीमित करने के पक्ष में मुख्य दलील यह है कि वे उसका प्रबंध किये जाने में अक्षम हैं और वे शोषण अथवा धोखधड़ी किये जाने में आसान हैं। यह भी कहा जाता है कि वे प्रबंध के सिद्धांतों को नहीं जानती और इसलिए वहां प्रबल संभावना होगी पुरुष रिश्तेदारों का उसके अधिकार हड़पने का। इन सभी बातों पर मेरा एक ही उत्तर है। सदन इस बात से अवगत है कि आज बम्बई में बेटी के लिए पूर्ण रूप से सम्पत्ति का अधिकार है। इसलिए उस आधार पर मैं नहीं सोचती कि उन्हें किसी बात का जोखिम है। दूसरी दलील यह है कि ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं, जहां पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक कुशल प्रबंधक सिद्ध हुई हैं। एक अन्य दलील भी है। इसमें सन्देह नहीं मैं इस बात से सहमत हूँ कि महिलाएं निरक्षर हैं, परन्तु क्या मैं यह पूछ सकती हूँ कि क्या पुरुष निरक्षर नहीं होते? आज भी चार पुरुषों में से तीन पुरुष निरक्षर हैं। (एक माननीय सदस्यः दस में से नौ।) इस तरह पुरुषों को मिलने वाला लाभ भी चार पुरुषों में से एक तक ही सीमित है। ( एक माननीय सदस्यः वे अपनी माताओं के बेटे भी हैं।) यह भी याद रखना चाहिए कि महिलाओं में साक्षरता का प्रतिशत तीव्र गति से बढ़ता जा रहा है, जबकि पुरुषों में ऐसा नहीं है। ( श्री एच.वी. कामथः एक प्रश्न?)

जहां तक महिला के हिस्से का संबंध है, मैंने पहले ही प्रवर समिति की स्थिति के बारे में बता दिया है। हमने बेटी के लिए भी समान हिस्सा दिए जाने की सिफारिश की है। मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि आपको काफी उदार होना चाहिए। प्रवर समिति द्वारा की गई सिफारिशों का अनुमोदन करने के लिए बिना किसी हिचकिचाहट के। अब मैं दूसरे विषय पर आती हूँ अर्थात् कि पत्नी विवाह। फिर भी इस विषय पर मैं अधिक बोलना चाहती हूँ, वैसा नहीं करूँगी, क्योंकि मेरे पास सीमित समय है। केवल यही नहीं है, बल्कि इस विषय पर विधि मंत्री ने काफी प्रकाश डाला है तथा अन्य कई वक्ताओं ने भी कई दलीलें, आर्थिक, सामाजिक तथा अन्य विषयों पर दी गई हैं। यहां तक कि अपनी दलीलों के समर्थन में धर्म और आध्यात्मवाद के बारे में बताया गया है। परन्तु बहुत हल्के तरीके से भावनाओं को व्यक्त किया गया है। यदि पुरुष स्वस्थ और धनी है तो वह बार-बार हल्के तरीके से भावनाओं को व्यक्त किया गया है। उदाहरणार्थ यदि पुरुष स्वस्थ और धनी है तो वह बार-बार विवाह क्यों नहीं कर सकता? यदि एक और भी पत्नीत्व का नियम लागू किया जाता है, तो कितने हिंदू मुसलमान हो जाएंगे, बहुपत्नीत्व का लाभ उठाने। मुझे इस प्रश्न का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मैंने एक