(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 114

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रहा हूँ। यह मुख्य कारणों में से एक कारण है। आपको तार्किक होना चाहिए। मैं अपनी बहनों की भावनाओं को समझ सकता हूँ। यह मत सोचिए कि मैं महिलाओं से नफरत करता हूँ, कि मैं नारी विरोधी हूँ या मेरे हृदय में महिलाओं के लिए भावनाएं नहीं हैं। ( एक माननीय सदस्यः वह विवाहित पुरुष हैं।) जी हां, मैं विवाहित पुरुष हूँ। मेरी पत्नी नरम स्वभाव की है। मेरा विवाह हिंदू शास्त्र पद्धति से सम्पन्न हुआ था। मेरी हिंदू परिवार के आदर्शों के अनुसार पाल-पोस कर बड़ी हुई सरल और निष्कपट महिला पत्नी है। ( माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कैसी दयनीय स्थिति है) हो सकता है, आपको दयनीय लगे, परन्तु मुझे लैंवेंडर, लिपस्टिक और वैनिटी बैग या सेक्स की विविधताओं के लिए प्रेम करना पसन्द नहीं है। मैं प्रसन्न हूँ और मुझे विश्वास है कि प्रति सौ हिंदू घरों में से 98 घरों में इस प्रकार की पत्नियां हैं और वे प्रसन्न हैं ( एक माननीय सदस्यः 98 ही क्यों? 99.9 प्रतिशत ऐसी ही हैं।) मुझे यह सुनकर प्रसन्नता है कि मेरे एक मित्र का कहना है कि 99.9 प्रतिशत ऐसी ही हैं। यह बात मेरी दलील की पुष्टि करती है। अतः मैं अपने माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर को बता सकता हूँ कि मुझे उन बड़े परिवर्तनों को करने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई है जो उन्होंने इस विधेयक में करने का विचार किया है। ( माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैंने भी ऐसा महसूस नहीं किया है।) मेरे माननीय मित्र कहते हैं कि वे भी इसकी आवश्यकता महसूस नहीं करते। यदि वे भी इन बड़े परिवर्तनों की वास्तव में आवश्यकता महसूस नहीं करते, तो क्या मैं यह मान लूं कि उनकी महत्वाकांक्षा के कारण हमें यह हिंदू संहिता विधेयक मिला है? मैं अपने मित्र डॉ. अम्बेडकर का अत्यंत प्रशंसक हूँ। इस विधानसभा से पूर्व कई वर्षों तक मुझे उनके साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मैं उनका आदर करता हूँ। मैं जानता हूँ कि संविधान अधिनियम के संबंध में वह प्रतिदिन कितना अधिक परिश्रम कर रहे हैं। ( माननीय सदस्यः वाह! वाह!!) मैं उनकी प्रशंसा करता हूँ। मैं उनको साधुवाद देता हूँ। परन्तु मैं इस बात की प्रशंसा नहीं करता जो उन्होंने उस सामाजिक विधान के संबंध में किया है और वास्तव में हिंदू समाज को तोड़ देगा, क्योंकि उसमें ऐसे क्रान्तिकारी परिवर्तन किए गए हैं, जिन्हें हममें से कुछ सदस्य अब महसूस कर सकते हैं। ( माननीय सदस्यगणः क्रान्ति नहीं! बिलकुल नहीं!) जी हां, मैं प्रसन्न हूँ कि नहीं-नहीं की आवाज़ उठी है। यदि यह विधेयक पारित होकर कानून में बदल जाता है, तोख्...,

बाबू रामनारायण सिंह (बिहारः सामान्य)ः नहीं?

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः क्या, नही।

बाबू रामनारायण सिंहः यह पारित होकर कानून नहीं बनेगा।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः मैं देखूँगा। यदि यह विधेयक पारित होकर यथावत