(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 115

100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कानून बन जाता है, तो मैं देखूंगा कि कौन बेहतर भविष्यवक्ता हैµ मैं, या वे लोग, जो ‘नहीं-नहीं’ कहते हैं।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः सामान्य)ः आप प्रतीक्षा कीजिए और देखिए।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः ठीक है, प्रतीक्षा कीजिए और देखिए। भावी पीढि़यां न्याय करेंगी और मैं नहीं सोचता कि भावी पीढि़यों तक आपको प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। आपको प्रतीक्षा करनी पड़ेगी आगामी चुनाव सम्पन्न होने तक यह देखने कि आपका देश आपके काम के बारे में क्या कहता है?

मौलाना हसरत मोहानीः वाह! वाह!! बहुत अच्छा कहा।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः श्रीमान, मेरी बहन श्रीमती दुर्गाबाई ने पहली बात यह उठाई थी कि उस निर्देशक सिद्धांत के पारित होने के बाद अब आपको हिंदू संहिता का विरोध नहीं करना चाहिए। जब वह निर्देशक सिद्धांत सदन द्वारा स्वीकार कर लिया गया, तो मैंने सोचा कि सांप, यानी हिंदू संहिता विधेयक को मार डाला गया। परन्तु अब दिखाई देता है कि सांप को केवल घायल किया गया था_ उसने फिर अपना सिर उठा लिया है और समय के साथ वह विषभरा फन पसार देगा। यदि आप अपने निर्देशक सिद्धांत के प्रति सच्चे हैं, यदि आपका अभिप्राय उसे लागू करने का है, तो हिंदू संहिता विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? आप एक ऐसी सार्वभौमिक सिविल संहिता लाएं जो हिंदुओं, ईसाइयों, ( श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः क्या आप उसका समर्थन करेंगे?) पारसियों, सिखों, जैनियों, बौद्ध धर्मानुयायियों और मुसलमानों पर भी लागू होख्..., आप में मुसलमानों को छूने का साहस नहीं है, परन्तु आप जानते हैं कि आज हिंदू समाज इतनी बुरी दशा में है कि आप इसके साथ कुछ भी कर सकते हैं। कुछ अति आधुनिक व्यक्ति, जो खुलकर बोलते हैं, परन्तु जिन्हें देश में वास्तविक समर्थन प्राप्त नहीं है, वे ही इस विधेयक में रुचि रखते हैं। (हस्तक्षेप)

माननीय उपाध्यक्षः उन्हें अपनी बात कहने दें।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः लाखों गूंगे लोग इससे अनभिज्ञ हैं परन्तु वे कम बुद्धिमान अथवा समझदार नहीं हैं। क्योंकि उन्हें कॉलेज में शिक्षा नहीं मिली है अथवा विधानमंडल के सदस्य नहीं हैं। वे सोचते हैं कि उनके वैयक्तिक कानून में ऐसे क्रान्तिकारी परिवर्तन की आवश्यकता अवांछित है। उनकी अवहेलना नहीं की जानी चाहिए!

श्रीमती रेणुका रेः तब तो संविधान भी न बनाएं।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः इसीलिए मैं यह महसूस करता हूँ कि समस्त देश के