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श्रीमती जी दुर्गाबाईः बाह! बाह!!
श्रीमती रेणुका रेः अब परिवर्तन होना है, (हस्तक्षेप)।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः मुझे प्रसन्नता है कि मेरे भाषण के बीच हुए हस्तक्षेप से मुझे विचार करने का कुछ समय मिल गया। कृपया हस्तक्षेप एक साथ न करें। उपाध्यक्ष महोदय, मैं इतना बड़ा बेवकूफ नहीं हूँ कि अनेक लोग मेरी बातों से आश्वस्त हो जाएंगे, परन्तु मुझे आशा है कि हम में से कई सदस्य इस बारे में कुछ विचार करेंगे कि मुझे क्या कहना है। आशा कर लूँ कि मैं निष्ठापूर्वक हिंदूत्व, हिंदू कानून की वकालत करता हूँ। हिंदू संस्कृति में अविस्मरणीय परम्पराएं हैं, कालात्तर के चिन्तन हैं जो शायद हमारे लिए बुद्धिमत्ता नहीं होगी कि हम कलम से एक बार में ही उन्हें हटा दें। मैं यह अपील अपने दक्षिण पक्ष तथा वाम पक्ष के सभी सदस्यों से करना चाहता हूँ। श्रीमान, मैं आशंकित हूँ कि वर्तमान हिंदू संहिता विधेयक हमारे लिए क्या कर रही है? मैं इसमें हिदू जैसी कोई बात नहीं देखता। इसे अहिंदू कहना शायद अधिक ठीक है अथवा ‘हिंदू विरोधी’ संहिता।
श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगालः मुस्लिम)ः मुस्लिम संहिता?
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः यह चाहे और कुछ भी क्यों न हो, पर हिंदू संहिता नहीं है। यह हिंदूत्व की श्वास नहीं लेता_ इसमें हिंदू-विरोधी विचारों का समावेश है। इसमें हिंदू भावना के प्रति तीव्र भर्त्सना है, जो इस विधेयक में प्रारंभ से अन्त तक छायी हुई है।
श्री एच.वी. कामथः हिंदू भावना क्या है?
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः श्रीमान, क्या आप इसे हिंदूत्व कहते हैं? आप कृपया अपनी विवाह और उत्तराधिकार की पद्धति पर विचार करें, जो हिंदू पद्धति अथवा हिंदू समाज का आधार स्तम्भ है। क्या आप इसे कम आंकना चाहते हैं जैसा कि आप कर रहे हैं? यही वह प्रश्न है जिसका उत्तर आपको न सिर्फ हमें, बल्कि इस देश से बाहर के लोगों और भावी पीढि़यों को भी देना है।
श्रीमान, मैं महसूस करता हूँ कि यदि हम कानून को इसी तरीके से संहिताबद्ध करना चाहते हैं, जैसाकि इस कानून को संहिताबद्ध किया जा रहा है, तो यह केवल बौद्धिक मनोरंजन है। इसमें संहिताबद्ध करना केवल औपचारिक करना है। अतः मैं माननीय सदस्यों से अपील करूंगा कि यह बुद्धिमत्तापूर्ण है। किसी ने भी इसकी आवश्यकता महसूस की है। इस बारे में अलग-अलग उच्च न्यायालयों तथा जिला न्यायालयों से न्यायाधीशों के मन देखे जाएं। यही वे लोग हैं, जिन्हें हिंदू कानून को लागू करना है। क्या सरकार ने न्यायपालिका से उन मांगों के बारे में मत एकत्र किए हैं कि क्यों हिंदू कानून को संहिताबद्ध किया जाना है और उस तरीके के बारे में भी जिसके माध्यम से यह किया जाना है? नहीं। क्या लोगों की ओर से वह आम मांग रही है, जिन्हें स्वयं