(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 122

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कानून खड़ा है? यही तीन धाराएँ हिंदू जीवन के समग्र क्षेत्र और देश के कार्यकलाप को इंगित करती हैं? मैं इस अनभिज्ञता के प्रति केवल सहानुभूति प्रकट कर सकता हूँ। संयुक्त परिवार की संपत्ति, विभाजन, संयुक्त परिवार का व्यवसाय, धार्मिक ओर धर्मार्थ न्यास, उपहार, और अंतरण और दूसरी चीजें? वे विशाल क्षेत्र का निर्माण करते हैं, जिन्हें छोड़ दिया गया है।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः उसमें वसीयतों का भी संदर्भ दिया गया है।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः वसीयत का केवल संदर्भ दे देने का अभिप्राय यह नहीं है कि इस बारे में संपूर्ण और व्यापक रूप से विचार किया गया है। चाहे कोई भी स्थिति क्यों न हो, मैं डॉ. अम्बेडकर का आभारी हूँ। वे शालीन हैं। वे इस बात का कभी दावा नहीं करते कि उन्होंने थका देने वाली संहिता को प्रस्तुत किया है। यदि मेरे दक्षिण पक्ष के मित्र यह सोचते हैं कि यही संपूर्ण हिंदू संहिता है, तो वे अम्बेडकर की सोच से बाहर हैं। श्रीमान, यदि इस हिंदू संहिता को उसी रूप में पारित कर दिया जाता है, जिस रूप में हमारे सामने प्रस्तुत है, तो किसी अन्य कारण से भी इसके उद्देश्य की भर्त्सना की जाएगी। मेरी माननीय बहन दुर्गाबाई और मैसूर से आए मेरे माननीय मित्र ने कल कहा था, ठीक है, आप इसके बारे में क्यों चिन्तित हैंः इससे कृषि-सम्पत्ति के टुकड़े-टुकड़े नहीं होंगे। मैं नहीं जानता कि उन्होंने महसूस किया कि वे इस विधेयक को रद्द करने के लिए सबसे सशक्त दलील दी थी। अनभिज्ञतावश मेरी बहन और भाई ने इस विधेयक को देखते ही रद्द करने के लिए सबसे सशक्त दलील दे दी थी। आप सम्पत्ति के निपटारे को नियमित करने जा रहे हैं। अब यह सामान्य तौर पर स्वीकार किया जाता है कि इस देश में 90 प्रतिशत अचल सम्पत्ति गांवों में है, केंद्र शासित क्षेत्रों को छोड़कर प्रातों में है। अतः वे इस संहिता के दायरे में बाहर होंगे। घर-मकान और अन्य स्थायी सम्पत्ति केंद्र शासित क्षेत्र के अन्तर्गत, सीधे भारत सरकार के अधीन है पर संहिता लागू होगी। इसके बाद यह दावा किस प्रकार है कि यह संहिता सभी प्रांतों के सभी हिंदुओं पर लागू होगी? इस विधेयक को बाहर फैंकने के लिए यह सबसे सशक्त दलील है। बाहर फैंकना इस आधार पर जिनका मैंने उल्लेख किया कि यह विधेयक अपने उद्देश्यों की पूर्ति में असफल है। तीन वर्गों के अलावा जिनका मैंने उल्लेख किया कई अन्य बातें हैं जिनके बारे में अब भी विचार किया जाना है। यह दलील दी जाएगी कि संविधान के अधिनियम के अनुसार प्रांतों की कृषि-भूमि प्रांतों का अपना विषय है। इसी प्रकार धार्मिक और धर्मार्थ न्यास की सम्पत्तियां हैं, इसी प्रकार संयुक्त परिवार की सम्पत्ति है और विभाजन तथा स्वतः अर्जित सम्पत्ति आदि के विषय हैं। जब इन विशाल क्षेत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा, मैं सदन से गंभीरपूर्वक पूछता हूँ कि क्या वे उन लोगों के दावों से वास्तव में संतुष्ट हैं जो यह विचार करते हैं कि यह संहिता एक थका देने वाला विषय होने जा रहा अथवा पूर्ण रूप से अलिंगन करने वाली संहिता है तथा यह संहिता सभी सामाजिक और आर्थिक बुराइयों