(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 126

111

है कि एक ओर इसमें उस प्रकार के विवाह के लक्षण दिखते हैं जैसे सांस्कारिक विवाह के लक्षण होते हैं, किंतु इस सांस्कारिक विवाह के अन्तर्गत ऐसी कई बातें प्रारंभ की गई हैं, जिन्हें विचार की दृष्टि से सांस्कारिक विवाह नहीं कहा जा सकता अथवा पवित्र धर्मानुष्ठान विवाह नहीं कहा जा सकता। प्रतिबिंंधत कोटियां देखिए। पक्षों के लक्षणों की ओर देखिए। यहाँ अन्तरजातीय विवाह हो सकता है, जाति से बाहर विवाह हो सकता है। सगोत्रे विवाह हो सकता है और इसके साथ ही वह सांस्कारिक विवाह भी होगा। श्रीमान, यह भी रोचक बात है कि एक ओर सांस्कारिक विवाह प्रस्तावित किया जा रहा है, इसके साथ ही सिविल मैरिज का भी प्रस्ताव है। मैं नहीं जानता कि इस प्रकार से विवाह को हिंदू संहिता में किस प्रकार सम्मिलित किया गया है। इस तरह उन्होंने नितांत भिन्न स्थिति पैदा की है, परन्तु सबसे आपत्तिजनक स्थिति यह है कि जब सांस्कारिक विवाह के प्रारुप में प्रतिबंधित कोटियों का एक विशेष वर्ग रखा गया है तथा सिविल मैरिज में पूर्णतः भिन्न वर्ग रखा गया है। वहां प्रतिबंधित कोटि की परिधि को कम किया गया है। इतना ही नहीं, बल्कि कई मामलों में यह विशुद्ध कौटुंबिक विवाह हो गया है। श्रीमान, मैं नहीं समझता, यह क्यों आवश्यक था? क्या हम इस विधिकरण द्वारा सभी प्रकार की नैतिक शिथिलता और अवैधता के लिए प्रत्यक्ष प्रोत्साहन देना चाहते हैं? जो दुर्भाग्य वश इस देश के युवा वर्ग पर आक्रमण कर रही है। तो क्या हम अपने अनुमोदन की मुद्रण-अनुमति दे रहे हैं? यह ऐसा प्रश्न है जिस पर मैं अपने माननीय मित्र से अधिक गंभीर रूप से विचार करने और उत्तर देने के लिए कहूँगा और यह हंसी-मजाक अथवा हल्केपन की भावना से नहीं, परन्तु ऐसी गंभीरता से उपजा है, जिसकी मांग, एक कठिन सामाजिक समस्या के कारण भी उठी है।

मैं महसूस करता हूँ कि हिंदू विवाह की आधारभूत संकल्पना में तलाक के विषय को विधेयक में शामिल करके सबसे असंगत प्रहार किया गया है और यह स्थिति विवाह संबंधी हिंदू विचारों से विपरीत है। हिंदू विवाह, जैसा कि उस प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञात है। जो स्वयं हिंदू कहलाता है, जो खुद को हिंदू होने का दावा करता है। जो ईमानदारी से अपने को हिंदू कहलाने का गौरव प्राप्त करता है, जैसा कि मैं हूँ, सांस्कारिक विवाह है और वह सिविल कांट्रेक्ट (कोर्ट की शादी) नहीं है। इस प्रकार यह हमारे लिए स्वीकार करना कठिन नहीं होगा कि तलाक की संकल्पना विदेशी है। विवाह के द्वारा मिलन मेल पवित्र है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार और नितांत रूप से अविच्छेदनीय है। (हस्तक्षेप)। यदि आप चाहते हैं कि मैं अपना भाषण छोटा कर दूं तो आप केवल महत्वपूर्ण मामलों में ही मेरा हस्तक्षेप करें। मुझे हस्तक्षेपों से भय नहीं है, मैं जानता हूँ कि उनका किस प्रकार उत्तर देना है। मैं उनका अपने ही तरीके से उत्तर दे सकता हूँ। परन्तु यदि आप मुझे इसी प्रकार हस्तक्षेप करते रहेंगे, मेरा भाषण अनायास लम्बा होता जाएगा तथा मैं जो उत्तर दूंगा, उन पर आप भी प्रसन्नता महसूस नहीं कर पाएंगे।