116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नहीं दिखाया है। यह कलंक हमसे सम्बद्ध है। यदि आप अपने आचरण में महात्मा गांधी के आदर्शों के निकट नहीं हैं, परन्तु उन आदर्शों को आप अवसरानुकूल या उसके बिना भी बताते रहते हैं अथवा प्रत्येक बात में उनका नाम लेते हैं पर उनके चरणचिह्नों पर नहीं चलते तो यह दोष महात्मा जी का नहीं है, यह दोष हमारा है। ठीक उसी प्रकार आप हिंदू शास्त्रों अथवा विधिवेताओं का प्रतिवाद करते हैं, उन्होंने उच्च आदर्श स्थापित किए हैं, यह बात आपके लिए है कि आप उन आदर्शों के अनुकूल चलें। हमारे सर्वोत्तम प्रयत्नों के बावजूद यह संभव नहीं है कि प्रत्येक अन्याय अथवा संकट को समाप्त किया जा सके। मानव संस्थाएं अपूर्ण हैं। कोई भी मानवीय दक्षता कोई प्रक्रिया नहीं बना सकती, कोई मशीन अथवा कोई एजेन्सी जिससे सामाजिक अन्याय की सभी संभावनाओं को पूर्णतया समाप्त किया जा सके। हमें इसके बारे में स्पष्ट होना चाहिए और हमें इसे स्वीकार भी करना चाहिए।
मेरी मित्र ने सम्पत्ति के प्रबंधन के तारतम्य में बताया कि वे ऐसी महिलाओं को जानती हैं, जो सम्पत्ति की कुशल प्रबंधक हैंख्...,
माननीय श्री एन.वी. गाइगिल (निर्माण, खदान व विद्युत मंत्री)ः वे पुरुषों के भी हैं।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः हाँ, वे पुरुषों की भी हैं। मैं नहीं सोचता कि इस सदन में कोई भी ऐसा विवाहित सदस्य है, जो इस से विवाद करेगा। पारिवारिक क्षेत्र में महिला शासक है। वही सब कुछ है। हममें उच्चतम है। विधि मंत्री अथवा उनके माननीय साथी उसके सामने झुक जाएंगे, चाहे वे यहाँ जितना ही दहाड़ें। वहां छड़ी द्वारा आप पर शासन नहीं किया जाता, परन्तु ऐसे विविध प्रकार के चाबुकों द्वारा शासन किया जाता है जो प्रेम के कोमल और मुलायम धागों से सज्जित हैं, जो सभी प्रकार की कटुता और कठोरता को वहां ले जाती हैं। अतः पुरुष वर्ग प्रसन्नता से उसके शासन के समक्ष झुक जाता है। वह पारिवारिक कार्यों की रानी है। कई विवाहित लोग मेरे विचार में अधिकांश विवाहित लोग यह बात स्पष्ट रूप से स्वीकार करेंगे।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः यही वह तरीका है, जिससे हम महिलाओं को धोखा देते हैं।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः अब हम इस संहिता द्वारा उन्हें धोखा देने जा रहे हैं। क्या आप यह सोचते हैं कि उनके साथ सबसे महान न्याय किया जाएगा, यदि आप उन्हें सम्पत्ति में उचित भाग दे देंगे। अध्यक्ष महोदय, हिंदू विचारों के अनुसार बच्ची की विशेष स्थिति होती है, उसकी भूमिका बेटे की भूमिका से नितांत भिन्न होती है। किसी भी माननीय सदस्य ने जिसने संस्कृत साहित्य का अध्ययन किया है अथवा उसे उसका ज्ञान है, मैं किसी भी प्रकार से यह अनुमान नहीं लगा सकता कि क्या ज्यादातर लोग इसे जानते हैं अथवा इसे कोई भी नहीं जानताख्...,