(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 134

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अलग-अलग आवश्यकताएँ होती हैं जो इस विशाल महाद्वीप का निर्माण करती हैं। और इसीलिए ‘महाजनो येन गतः स पंथः’।

फ्वेद विभिन्न स्मृत्यः विभिन्न नसउ मुनिर यस्य यातं नाभिन्नं।

धर्मस्य तत्वं निहिते गुह्यं महाजनो येन गतः स पंथ।य्

एक माननीय सदस्यः चलिए हम सभी महाजन हों।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः महाजन का अर्थ ऋणदाता नहीं है।

वह सभी के लिए सबसे क्रूर चोट है। इससे किस हद तक गहराई विदित होती है कि समाज का पतन हो गया है। हम रुपए या डालर या शिलिंग या पेंस के सिवाए कुछ नहीं सोच सकते। महाजन की विविध प्रकार से व्याख्या की गई है। महान व्यक्ति या उनमें से अधिकांश जैसे चाहे आप इसे अच्छे अर्थ में स्वीकार कर सकते हैं।

फ्वेद रिवाज सदाचार स्वरूप च प्रिययंत यन यस्मिन् देश येदाचरा।।य्

मैं कई अन्य उदाहरण देकर सदन को थकाना नहीं चाहता। परन्तु यह ऐसा विषय है कि मैं इसको बिल्कुल छोड़ भी नहीं सकता। यदि मैं अपने विचारों की संगतता से न्याय के माननीय सदस्यों को कायल करना चाहता हूँ, हिंदू शास्त्रों पर आधारित विचारों से। मैं सदन के समक्ष अपनी बात स्पष्ट करना चाहता हूँ। सदन इस बात को रद्द कर सकता है जो कुछ मैंने कहा हैः इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। परन्तु मैं उस निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधि हूँ, जो विशुद्ध रूप से क्षेत्रीय नहीं है, परन्तु वह ऐसा निर्वाचन-क्षेत्र है, जिसमें अनेक पुरुष और महिलाएं जो हिंदूत्व और हिंदू समाज में विश्वास करते हैं, जो प्राचीनकाल से ऋषियों की ऋचाओं से अधिशासित होते हैं। श्रीमान, फिलहाल मैं उस निर्वाचन-क्षेत्र के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता हूँ। यह सत्य है कि मैं इस संविधान सभा में अप्रत्यक्ष चुनाव पद्धति द्वारा आया हूँ। सिर्फ चार या पांच वोट से, परन्तु मैं सदन को विश्वास दिलाता हूँ कि मैंने देश के काफी कुछ अधिक महत्व के चुनाव लड़े हैं जो काफी महत्वपूर्ण निर्वाचन-क्षेत्र रहे हैं। इस संविधान सभा में आने के पहले मैंने केन्द्रीय विधानमंडल में कलकत्ता शहर का प्रतिनिधित्व किया है। इसके पूर्व मैंने कई जिलों को बनाकर उस प्रसीडेंसी डिवीजन का प्रतिनिधित्व किया था, जिसमें लाखों लोग हैं और प्रेसीडेंसी डिवीजन को भारत के सबसे सांस्कृतिक डिवीजनों में से एक डिवीजन माना जाता है। मैं लोगों को जानता हूँ, मैं उनकी नाड़ी पहचानता हूँ। मेरा अपना नगर प्राचीन शास्त्रीय विद्याओं के लिए प्रसिद्ध है। बंगाल में मेरा नाडिया जिला है, जिसने स्मृतियों, तंत्र, न्याय, वैष्णव दर्शन आदि की नवीन विचारधाराएं दी हैं। मैं विषयांतर नहीं कर रहा हूँ, परन्तु मैं उस महान संस्कृति के उत्तराधिकारियों के प्रति कर्तव्य निभाने में असफल रह जाऊंगा, यदि मैंने हिंदू संहिता के इन मामलों के संबंध में अपने मत और