120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विचारों को सदन के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। मेरा अपने और समुदाय के प्रति कर्तव्य है कि अपने विचारों को व्यक्त करूं, ताकि किसी अन्तर्निहित गलती के कारण निर्णय हमारे विरुद्ध न हो जाए। जो भी हो मुझे शीघ्रता करनी चाहिए।
मैंने आपको और सम्मान बता दिया है, जो शास्त्रों ने हमारी महिलाओं को दिए हैं। जब प्रसिद्ध रानी इन्दुमती का निधन हो गया था तो राजा अजह ने उनके शोक में इस प्रकार विलख उठे थेµ
फ्गृहिणी सचिव भितः सखी प्रिय शब्द ललित कारक विंध
करुणा जिम लेखन मृदना हरत वदे किंग ना या हृतं।य्
‘‘ओह, कठोर मृत्यु के देवता! आपने मुझ से क्या नहीं छीन लिया? आपने मेरे साथ क्या अन्याय नहीं किया? एक प्रहार में आपने उसे छीन लिया, जो मेरी गृहिणी थी, घर की रानी अर्थात् मेरी सचिव कौन थी? सचिव अर्थात् मंत्री। वह मेरी मंत्री थी। वह मेरे परिवार की रानी ही नहीं थी, अपितु मेरी मंत्री थी, एकान्त में मेरी अनन्य मित्र थी तथा मेरे प्रेम में समर्पित साथिन थी।’’
श्रीमान, यही वह स्थान था, जो हमारे समाज में महिलाओं को मिला था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि केवल लोभ, लालच, द्वेष अथवा बैर या आप चाहे कुछ भी कहें, के कारण महिलाओं को निचली श्रेणी में गिरा दिया गया था। अगर उसे बेटे के समान उत्तराधिकार के संबंध में विशेष प्रतिष्ठा नहीं दी गई है, तो इसका कारण यह है कि वह अपने पिता के परिवार के अलग किसी अन्य परिवार के लिए है और कि उस परिवार की सम्पत्ति का उन्हीं लोगों में निराकरण होना है, जो उस को परिवार देखते हैं। वे वंश को बनाए रखते हैं तथा पारिवारिक परम्पराओं, आचार-विचारों और रिवाजों की पवित्रता को बनाए रखते हैं तथा जो परिवार की प्रथाओं और समारोहों को बराबर मनाते रहते हैं। जैसे ही एक कन्या का विवाह हो जाता है, वह दूसरे परिवार में घुल-मिल जाती है और हिंदू संकल्पना के अनुसार, पत्नी की स्थिति पति के परिवार में अत्यंत आदरणीय हो जाती है। इस आदर से भी अधिक जो बेटी को पिता के घर मिलता है। मैं पुनः कालीदास कृत ‘शकुन्तला’ का उदाहरण देना चाहूँगा। जब रानी शकुन्तला को राजा दुष्यन्त पहचान न सके, तो उन्होंने कहाµफ्मुझे याद नहीं आता कि मैंने आपसे विवाह किया है।य् उसके बाद ऋषि द्वारा शकुन्तला को उपदेश दिया जाता है कि उसे अपने पति के घर में दासी के रूप में रहना है। चाहे दासी के रूप में भी क्यों न हो, क्योंकि पिता के घर की तुलना में उसकी यही सम्मानीय स्थिति है।
माननीय श्री एन.वी. गाडगिलः यही वह स्थिति है जिससे आदमी लोग व्यवहार करते हैं?