121
श्री एम. तिरुमला राव (मद्रासः सामान्य)ः वह याददाश्त खोने से पीडि़त थे।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः नहीं, वह विस्मृत होने से पीडि़त नहीं थे। इसका कारण यह था कि राजा दुष्यंत एक श्राप से ग्रसित थे, जिसके कारण उन्हें अपने विवाह से संबंधित सब बातें भूलना था। वे जानबूझकर भूल के नैतिक दोषी नहीं थे। आश्चर्यजनक अज्ञानता है!
श्री वी.एन. मुनावल्ली (बम्बई राज्य)ः यह कैसा माफीनामा है।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः मैं शकुन्तला काव्य का रचयिता नहीं हूँ। आप इसे बहाना कहें या आप तो चाहे कहें। मुझे उसकी चिन्ता नहीं है। परन्तु मैंने शकुन्तला का उदाहरण इसलिए दिया है कि इसके रचयिता कालीदास विश्व कवि हैं और विश्वभर में उनका सम्मान है और आप के द्वारा शकुन्तला अवज्ञा किए जाने के बावजूद वह कृति सदैव विश्व की अनुपम साहित्यिक कृति के आदर्श के तौर पर मानी जाएगी। हमारी राष्ट्रीय संस्थाओं, संस्कृति और परम्पराओं की अविज्ञा करने की कोई सीमा होनी चाहिए। श्रीमान, अध्यक्ष महोदय मुझे प्लेटो की प्रसिद्ध पंक्ति याद आती है। मैं उसे इस समय ज्यों का त्यों नहीं दोहरा सकता, परन्तु उन्होंने कहा थाµ‘कोई व्यक्ति जो अपने देश की परम्पराओं, उसकी शानदार विरासत और संस्कृति के प्रति अनादर भाव रखता है, वह देशद्रोही है तथा वह ऐसा व्यक्ति है जिसे बड़ा दंड दिया जाना चाहिए।’ मैं उन लोगों की देशभक्ति को नहीं समझता, उनकी राष्ट्रभक्ति को जिनके पास अपनी प्राचीन संस्कृति और उत्तराधिकार के प्रति केवल भर्त्सना और उपहास के अलावा और कुछ नहीं है।
श्री एच.वी. कामथः आपने गलत समझा। हम में से कोई भी अपनी प्राचीन संस्कृतियों का विरोधी नहीं है।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः हम इस संहिता के संबंध में किन्हीं मामलों में मतभेद रख सकते हैं, परन्तु इससे किसी के भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी। न मेरे, न आपके हमारे महान प्राचीन ऋषियों की प्रतिष्ठा को कम करते हुए यहां माफी भी मांगते नहीं आ रही है। वे आपके रेडिया-प्रचार तथा समाचार-पत्रों के समाचारों की चिन्ता नहीं करते। उन्होंने किया, जो वे समुदाय के हितों के लिए सर्वोत्तम मानते थे। यदि आप आज उत्तराधिकार के मामले में बेटी को भी बेटे के समान मानते हैं, तो मुझे आशंका है कि इसमें अनेक जटिलताएं उत्पन्न हो जाएंगी। जब लड़की को यह पता लगता है कि उसे अपने पिता की सम्पत्ति में भाग मिल रहा है, जब उसके भाइयों को यह पता है कि उनकी बहन सम्पत्ति में सहभागी है तथा इससे सम्पत्ति उसके विवाह के साथ किसी अन्य परिवार में हस्तानान्तरित हो जाएगी, तो इसमें किसकी रुचि होगी कि लड़की का विवाह करा दिया जाए? मैं यह जानना चाहता हूँ।