(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 137

122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री एच.वी. कामथः उसकी (लड़की) अपनी रुचि होगी।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः मेरे माननीय मित्र ने कहा है कि लड़की की अपनी रुचि होगी कि यथाशीघ्र विवाह हो जाए। श्रीमान, मैं महसूस करता हूँ कि इस प्रकार लड़की को अपने ही मार्ग में अनेक गड्ढे मिलने लगेंगे।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः क्या आप उस (लड़की) पर अविश्वास करते हैं?

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः अविश्वास का प्रश्न ही नहीं है। हिंदू ऋषियों ने यह व्यवस्था दी है कि दम्पत्ति के माता-पिता द्वारा दम्पत्ति के सर्वोत्तम हितों को देखते हुए, विवाह के लिए मोल-भाव करना चाहिए।

श्रीमती रेणुका रेः शकुन्तला ने किया किया?

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः मैं जानता हूँ कि शकुन्तला ने उस तरीके से विवाह नहीं किया। परन्तु मेरे मित्र और बहन के हस्तक्षेप करने पर मुझे एक कहानी याद आती है। एक व्यक्ति ने छः महीने तक महाभारत और रामायण का पाठ अपने घर में करवाया। इसके बाद उसने अपनी बेटी से पूछाµफ्तुमने कहानी सुनी। तुम्हें इससे क्या सीख मिली?य् बेटी ने उत्तर दियाµफ्महाभारत से मुझे यह सीख मिली कि मैं भी पांच पति रख सकती हूँ जैसे कि द्रौपदी के पांच पति थे।य् पूरी महाभारत के सुनने के बाद यह वह था जो उसने यही सीखा। इसी तरह रामायण की कथा सुनने के बाद उसकी पुत्रवधु ने कहा, यह बिल्कुल स्पष्ट हैµफ्जैसे ही मेरे पति का निधन होगा, वैसे ही मैं अपने पति के भाई के साथ विवाह कर सकती हूँ। फ्आप जानते हैं कि रावण की मृत्यु के बाद क्या हुआ? उनकी विधवा मन्दोदरी ने उनके भाई विभीषण के साथ विवाह कर लिया।य् श्रीमान, हिंदू कानून के अनुसार कई प्रकार के विवाह होते हैं। एक विवाह ‘गंधर्व’ होता है, जिसके बारे में हमने विधेयक में कोई व्यवस्था नहीं की है, यद्यपि संहिता में इस प्रकार के सभी मामलों के लिए सिविल विवाह की व्यवस्था की गई है। इसलिए, मैं कहता हूँ कि इस संहिताबद्ध हिंदू कानून से साधारण हिंदू परिवारों में आप अलग-अलग सदस्यों के रिश्तों के बीच परिवर्तन ला रहे हैं। क्या यह संबंधों में मधुरता लाने जा रहा है अथवा परिवारिक जीवन में शांति?

बाबू रामनारायण सिंहः किसी भी प्रकार संभव नहीं।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः ऐसा नहीं हो कि भाइयों, बहनों और बहनों के पतियों के मध्य मधुरता बनी रहे जो वर्तमान में है। क्योंकि जब लड़की का विवाह हो जाता है, तो वह ससुर के घर से अपने पति, अपने बेटे या किसी अन्य व्यक्ति को रखने के लिए ले आयेगी, पिता के परिवार की सम्पत्ति पर नियंत्रण रखा जा सके। इसका परिण् ाम कटुता, द्वेष, ईर्ष्या और मुकदमेबाजी या न जाने क्या-क्या होगा। अन्ततोगत्वा परिवार