(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 138

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खंडित हो जाएगा। क्या हम ऐसी संहिता बना रहे हैं, जो परिवार को तोड़ने की सभी सुविधाएं जुटा देगा? क्या सामाजिक जीवन का परमार्थ तब हासिल होगा जब प्रत्येक परिवार टूटे और पारिवारिक शांति भंग हो जाए? यह आपके लिए है कि क्या किया जाना चाहिए। मैं यह महसूस करता हूँ कि यह सब घटित तो होना ही है।

श्रीमान, लड़की को शिक्षित किया जाना चाहिए। परन्तु उसके विवाह के बाद जब वह अपने ससुर के घर जाती है तो वह निर्देशित और आपेक्षित की जाती है। सभी मामलों में अपने पति द्वारा अथवा पति के किसी संबंधी द्वारा नहीं होगा। यह उसके हित में है कि उसे विधान द्वारा अपने पिता की सम्पत्ति में भाग मिले। आप यह कहेंगे कि आप एक दूसरा कानून बनाना चाहेंगे आदेशिक किए जाने के विरुद्ध उस सम्पत्ति के संबंध में जो उसे अपने पिता से मिली है। यदि आप हमेशा ऐसे कानून बनाते रहे कि आपको हिंदू संहिता बनाने का बौद्धिक संतोष बना रहे, तो यह बात में आप पर छोड़ता हूँ। इसलिए मैं यह महसूस करता हूँ कि यह एक क्रान्तिकारी परिवर्तन है, और इसे प्रारंभ नहीं किया जाना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं लड़कियों के लिए व्यवस्था के प्रतिकूल हूँ। सभी प्रकार से उनके लिए व्यवस्था की जानी चाहिए। विवाहित लड़कियों के लिए कोई प्रावधान बनाएं। उनकी शिक्षा और विवाह को उनके पिता की सम्पत्ति में पहला दायित्व माना जाना चाहिए। इसे उस सम्पत्ति का पूर्ण दायित्व बनाएं, ताकि उनके विवाह के बाद जब वह अपने पति के घर में घुलमिल जाएंगी, तब वह अपने पिता की सम्पत्ति से वंचित हो जाएगी। परन्तु यह आप नहीं कर रहे हैं। आप लिंग की समानता की बात करते हैं, न्याय और औचित्य की बात करते हैं, परन्तु आप लड़की को अनुमति देते हैं कि वह न केवल अपने पिता की सम्पत्ति को उत्तराधिकार भाई के प्राप्त करें बल्कि वह अपने पति अथवा ससुर की सम्पत्ति में भी भागीदार हो यह समता का अधिकार प्रतिशोध का है। लड़की को दोनों परिवारों से सम्पत्ति नहीं मिलनी चाहिए। इससे सम्पत्ति में ज्यादा टुकड़े हो जाएंगे।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः लड़के को भी अपनी मां की सम्पत्ति में हिस्सा मिलेगा?

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः बेटी चाहे वह विवाहित हो, अविवाहित हो अथवा विधवा हो, उसे मां की सम्पत्ति मिलेगी। मेरे माननीय मित्र हिंदू कानून का अध्ययन कर लें। यहां तक कि हिंदू कानून के अन्तर्गत व्यवस्था की गई है, सभी प्रकार की बेटियों को स्त्रीधन सम्पत्ति प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः नहीं, नहीं, नहीं, नहीं।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रेयः मैं कहता हूँµहां, हां, हां, हां। इस प्रकार का प्रावधान बेटी के लिए वर्तमान के हिंदू कानून के अनुसार है। मैं दूसरों की आशंकाओं को दूर नहीं कर सकता। ऐसा हिंदू कानून है। कानूनी व्यवस्था से जुड़े सदस्यों को इसकी जानकारी