126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए ही नहीं है कि उन्होंने चेतावनी दी, वर्तमान संविधान निर्मात्री सभा जैसे वह आज निर्मित की गई है, में इस प्रकार के विधान पर बहस नहीं की जानी चाहिए। मैं अपने स्वयं के लिए बात कह सकता हूँ। मैं अन्य लोगों की बात नहीं कह सकता। मैं ईमानदारी से महसूस करता हूँ कि किसी भी ऐसे विधिकरण के लिए कानूनी अथवा नैतिक रूप से पक्षधर होने का मुझे कोई अधिकार नहीं है। कोई विधेयक जो दिन-प्रतिदिन के प्रशासन के लिए नितांत आवश्यक नहीं है। मैं केवल चार मतों से संविधानसभा में आया हूं। मैं यहां और अब ईमानदारी से घोषित कर सकता हूँ कि जब मैंने पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों से वे चार मत प्राप्त किए थे, तब मैंने उन्हें कभी यह वचन नहीं दिया था कि मैं उन्हें तलाक का अधिकार दिला दूंगा। न तो उन्होंने इस अधिकार की मांग नहीं की थी। मैं यह भी घोषित करता हूँ कि मैंने उन्हें यह वचन नहीं दिया कि मैं उत्तराधिकार के कानून को समाप्त करने जा रहा हूँ। मैंने उनसे यह भी नहीं कहा कि मैं संविधान सभा में इसलिए जा रहा हूँ कि एक नया विभाग और ‘विवाह मंत्रालय’ बनवा दूंगा, क्योंकि मैं महसूस करता हूँ कि यह केन्द्रीय सरकार में ऐसी संस्था की आवश्यकता होगी, यदि यह विधेयक पारित हो जाता है। उन औपचारिकताओं को देखें, जो यहां प्रदान की गई हैं। अतः व्यक्तिगत रूप से कहा जाए, तो मैं यह महसूस करता हूँ कि इस विधेयक के पक्ष या विपक्ष में मत देने का मुझे कोई अधिकार नहीं है। मैं सदन को सिर्फ यह बतला सकता हूँ कि मैं प्राधिकृत नहीं हूँ, क्योंकि मुझे अपने चुनाव-क्षेत्र से कोई विशिष्ट आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। जब मैं आम चुनाव द्वारा यहां आया उस समय देश के सामने स्पष्ट मुद्दे थे यथा देश की स्वतंत्रता की प्राप्ति और उससे सम्बद्ध मामले। और पिछली बार हम यहां आए, हमें केवल भारत के संविधान का निर्माण-कार्य ही करना था। अतः हम अपने दंभ को केवल गौरवन्वित करेंगे कि हम देश के सार्वभौम विधानमंडल के सदस्यों के रूप में सक्षम हैं इस तरह के कानून बनाने के लिए। परन्तु यह दावा कतरा हुआ है सभी तरह की नैतिकता से कुछ भी नुकसान नहीं होगा। यदि हम आगामी आम चुनावों के बाद, किसी अन्य तारीख तक इस विधेयक पर विचार करने के विषय को स्थगित कर दें। अध्यक्ष महोदय, मुझे यह जोरदार शब्दों में कहना है कि इस सदन द्वारा जो समय चुना गया है, वह सबसे हठधर्मी है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राष्ट्रीय सरकार को समस्याओं के बाद समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। क्या हम उन समस्याओं का समाधान कर पाए हैं? हमने नहीं किया है। क्या हम अपने देश में अधिक लोकप्रिय हैं हमसे अभिप्राय सभी से है, जिसमें विपक्ष भी सम्मिलित है? बेहिचक, नहीं! क्योंकि हमने आशाएँ जगाई हैं, जिन्हें हम पूरा नहीं कर सके हैं। यह स्थिति कई कारणों से हो सकती है जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं है। यह कुछ ताकतों के अंतर्कलह के कारण हो सकती हैं जिन्होंने हमें अनजान और पूर्णतः असन्नद्ध कर दिया है, परन्तु देश भर में असंतोष है। वास्तव में, मैं रुचिकर नहीं लगता। संविधान सभा के सदस्य के रूप में अपनी पहचान बताने का। जब मैं रेलवे के डिब्बे में यात्रा करता हूं, क्योंकि जिस क्षण लोग यह जान जाते हैं, वे