(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 143

128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अवांछित है और इस देश में इस प्रकार के कानून बनाने की कोई मांग नहीं की गई है। मैं इसका विरोध करता हूँ, क्योंकि मैं महसूस करता हूँ कि सभी सामाजिक विधान पारित करने की गति मद्धिम होनी चाहिए और कानून बनाने मात्र से सामाजिक सुधार बड़े पैमाने पर नहीं किए जा सकते। ये सुधार लोकमत की शक्ति द्वारा आंतरिक रूप से आने चाहिए। समाज के भीतर पैदा किया जाना है। तीसरे, मैं इस विधेयक का विरोध करता हूँ, क्योंकि इसमें अधिकांशतः अनियमित तरीका अपनाया गया है, विधेयक को इस सदन में पारित किए जाने के लिए। मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं, क्योंकि मैं यह महसूस करता हूं कि मैं नैतिक रूप से इस विधेयक पर बहस करने और ऐसे विधानमंडल में इसे पारित करने के लिए सक्षम नहीं हूँ, जो इस समय गठित है। मैं इस विधेयक का विरोध करता हूँ, क्योंकि मैं महसूस करता हूँ कि उत्तराधिकार और विरासत के कानून को सम्मिलित करते हुए हिंदू कानून पद्धति के विवाह की संकल्पना में क्रांतिकारी परिवर्तन किए गए हैं। मैं इस विधेयक का विरोध करता हूँ, क्योंकि मैं महसूस करता हूँ कि इसमें सिविल विवाह रजिस्टर, सांस्कारिक विवाह रजिस्टर, विवाह नोटिस बुक, विवाहों का महानिदेशक, विवाहों का महापंजीयक, विवाहों का मंत्रालय और इसी प्रकार अन्य चीजों को शामिल करते हुए इस विधेयक से अनेक प्रकार की अनावश्यक जटिलताएं उत्पन्न होंगी। मैं इस विधेयक का इसके आगे इस आधार पर विरोध करता हूँ कि इस विधेयक से हमारे परिवारों में कटुता, वि शृंखलता तथा द्वेषभाव बढ़ेगा जो समाज का विखंडन करेगा। मैं इस विधेयक का इस आधार पर भी विरोध करता हूँ, क्योंकि यह विधेयक अलोकतांत्रिक है क्योंकि देश का अधिकांश लोकमत इसके विरुद्ध है। इन सभी कारणों को दृष्टि में रखते हुए, मैं महसूस करता हूँ कि नैतिक दृष्टि के आधार पर मुझमें जितनी भी शक्ति है, उसके आधार पर इस विधेयक का विरोध करूं।

इन कुछ शब्दों के साथ, हाँ ये कुछ शब्द हैं इस महापातक विधान की दृष्टि से। इसमें निहित मुद्दों की गंभीरता की दृष्टि से विरोध स्वरूप मेरे ये कुछ शब्द जो विरोध उभरे हैं और इसकी प्रतिध्वनि समाज पर होगी। कोई भी व्यक्ति जो वास्तव में इस विधानमण्डल की दृष्टि से पैदा हुई इस धमकी से समाज की रक्षा करना चाहता है, वह स्पष्ट और तर्कमूलक हो सकता है। परन्तु उसे इन सभी बातों के लिए विचार करना होगा।

ऽमाननीय श्री एन.वी. गाडगिलः मैं इस विधेयक पर बहस में भाग लेने के लिए उत्तेजित रहा हूँ, जो निःसंदेह क्रान्तिकारी है। मैंने अपने माननीय मित्र के भाषण को सर्वोच्च आदर के साथ सुना है, जिसके साथ मुझे सम्मान है। इस सदन में दस वर्षों से भी अधिक अवधि तक कार्य करने का, यदि कोई ऐसी बात है जो उन्हें विशिष्टता प्रदान करती हैं, तो वह उनकी निष्ठा है, जिसकी सिर्फ उनकी महान वाक्पटुता से की जाती है। मैं उनके साथ पूर्णतया सहमत हूँ कि समाज-सुधार के मामले में किसी को

ऽसीए. (विधा.) डी., खंड 2, भाग II, 1 मार्च, 1949, पृष्ठ 1015-20